जानिए इस नवरात्रि क्या है कलश स्थापना की विधि, शुभ मुहूर्त और नियम

0

नई दिल्ली: कल से पूरे भारतदेश में नवरात्रि की धूम देखने को मिलेगी. हिन्दुओं का सबसे पवित्र त्योहार में से एक है नवरात्रि. तो चलिए आज आपको हम शारदीय नवरात्र में कलश स्थापना का क्या खास महत्व है उसके बारे में थोड़ी जानकारी देते है.

आपको बता दें कि नवरात्र के प्रथम दिन पूजा घर में कलश स्थापना की जाती है. इसका अपना ही अलग महत्व है इसलिए कलश स्थापना सही और उचित मुहूर्त में करना काफी जरूरी है.

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

कल से यानी बुधवार से नवरात्रे शुरू होंगे. इस दिन किस मुहूर्त पर कलश स्थापना की जाए उसका शुभ मुहूर्त सिर्फ एक घंटे दो मिनट तक ही रहेगा. ये मुहूर्त सुबह 6:22 से 7:25 तक रहेगा. इसके लिए आपको मंगलवार यानी आज से सारी तैयारी कर लेनी चाहिए. अगर किसी कारण आप सुबह के समय कलश स्थापित नहीं कर पाए तो घबराएं नहीं आप कल सुबह 11:36 बजे से 12:24 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना कर सकते है.

किस समय न करें कलश स्थापना

शास्त्रों के मुताबिक, अमावस्‍यायुक्‍त शुक्‍ल प्रति‍पदा मुहूर्त में कलश स्‍थापित करना सही नहीं होता है. इसलिए किसी भी कारण 9 अक्‍टूबर को कलश स्‍थापना नहीं होगी.

नवरात्र के समय किस तरह करें कलश स्थापना

सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद मंदिर को पुष्प से सजाए फिर माता माता दुर्गा, भगवान गणेश, नवग्रह कुबेरादि की मूर्ति के साथ कलश स्थापन करें. कलश के ऊपर रोली से ॐ और स्वास्तिक लिखें. कलश स्थापना के वक्त अपने पूजा गृह में पूर्व भाग में सात प्रकार के अनाज रखें. जौ भी डालें. इसके उपरांत कलश में गंगाजल, पान, सुपारी, लौंग, रोली, इलायची, कलावा, चंदन, अक्षत, हल्दी, रुपया, पुष्पादि डालें. फिर इस कलश को साथ सात अनाजों सहित रेत के ऊपर स्थापित करें. अब इसके बाद आम के पत्ते कलश के ऊपर रखें. जौ अथवा कच्चा चावल कटोरे में भरकर कलश के ऊपर रखें. अब उसके ऊपर चुन्नी से लिपटा हुआ नारियल रखें. इसके बाद पूरी श्रद्धा के साथ माता का ध्यान करें.

ये है कलश स्थापना के नियम

  • ये दिन कलश की स्थापना से शुरू किया जाता है. पूरे नौ दिनों मंदिर में अखंड ज्योति भी जलाई जाती है.कलश स्थापना करते वक्त यदि कुछ नियमों का पालन किया जाए तो काफी शुभ माना जाता है. इन नियमों का पालन अगर पूरी श्रद्धा के साथ की जाए तो माता काफी खुशा होती है.
  • अगर आप अपने घर में कलश स्थापित कर रहें हो तो सबसे पहले कलश में स्वास्तिक बनाएं. फिर कलश में मौली बांधें और उसमें जल भरें. इसमें गंगाजल, पान, सुपारी, लौंग, रोली, इलायची, कलावा, चंदन, अक्षत, हल्दी, रुपया, पुष्पादि डालें.

  • कलश स्थापना हमेशा शुभ समय पर ही करनी चाहिए. स्नान के बाद ध्यान करें. इसके बाद स्थल से अलग एक पाटे पर लाल व सफेद कपड़ा बिछाएं. इस पर अक्षत से अष्टदल बनाकर इस पर जल से भरा कलश स्थापित करें. कलश का मुंह खुला ना रखें. उसे किसी चीज से ढक दे. अगर कलश को किसी ढक्कन से ढका है तो उसे चावलों से भर दें और उसके बीचों-बीच एक नारियल भी रखें.
  • इन दिनों दोनों समय यानी (सुबह और शाम) आरती करना काफी अच्छा मना जाता है. माँ को वेला भोग भी लगाएं. माँ को लौंग और बताशा का भोग सबसे सरल भोग है. इस भोग के लिए लाल फूल सर्वोत्तम होता है.
  • माँ को आक, मदार, दूब और तुलसी बिल्कुल ना चढ़ाएं पूरे नौ दिन अपना अपना खान-पान को खास ध्यान रखें. तत्पश्चात देवी मंत्र का जाप करें. अब कलश के सामने गेहूं व जौ को मिट्टी के पात्र में रोपें. इसकी रोज पूजा भी करें और आखिर दिन इसको विसर्जित करें