वेब सीरीज से सीखा ठगी का खेल, वडोदरा में फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर चलाकर अमेरिकी नागरिकों से लाखों की ठगी h3>
गुजरात के वडोदरा में पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा किया है. वडोदरा एलसीबी जोन-2 की टीम ने अकोटा इलाके में चल रहे एक फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर पर छापा मारकर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपी वडोदरा में बैठकर अमेरिकी नागरिकों को लोन मंजूर होने का झांसा देते थे और उनसे डॉलर में रकम वसूलते थे.
पुलिस के मुताबिक, यह अवैध कॉल सेंटर अकोटा क्षेत्र स्थित प्रधानजी की चाल के पास बेरील अपार्टमेंट में संचालित किया जा रहा था. यहां से आरोपी विदेश में रहने वाले लोगों को कॉल कर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे थे. मामले की सूचना मिलने के बाद एलसीबी जोन-2 की टीम ने छापेमारी कर पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया.
यह भी पढ़ें: वडोदरा में तेज रफ्तार कार ने सड़क पर चल रही बुजुर्ग महिला को मारी टक्कर, CCTV में कैद हुआ हादसा
जांच में सामने आया कि आरोपी बिना किसी लाइसेंस या वैधानिक अनुमति के अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग का काम कर रहे थे. वे अमेरिकी नागरिकों से संपर्क कर उन्हें बताते थे कि उनका लोन मंजूर हो चुका है और आगे की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कुछ शुल्क जमा करना होगा.
लोन के नाम पर वसूले जाते थे 150 से 200 डॉलर
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पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे खुद को वित्तीय संस्था “सिटी क्रेडिट्स” का प्रतिनिधि बताकर अमेरिकी नागरिकों को कॉल करते थे. कॉल के दौरान वे भरोसा जीतने के लिए धाराप्रवाह अंग्रेजी का इस्तेमाल करते थे.
इसके बाद पीड़ितों से उनके डेबिट कार्ड का नंबर, कार्ड की समाप्ति तिथि और सीवीवी जैसी गोपनीय जानकारी हासिल की जाती थी. जानकारी मिलने के बाद उनसे 150 से 200 डॉलर तक की फीस वसूली जाती थी.
पुलिस का कहना है कि आरोपी सुनियोजित तरीके से लोगों को झांसे में लेते थे और ऑनलाइन माध्यम से रकम हासिल करते थे. शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि यह नेटवर्क पिछले दो महीनों से सक्रिय था.
डार्क वेब से जुटाते थे अमेरिकी नागरिकों के नंबर
डीसीपी जोन-2 मंजिता वंजारा के अनुसार, आरोपियों के पास विदेशी नागरिकों के संपर्क नंबर डार्क वेब के जरिए पहुंचते थे. इन्हीं नंबरों पर कॉल कर वे अपने ठगी के जाल को फैलाते थे.
जांच में पता चला कि गिरफ्तार आरोपियों में एक व्यक्ति शेयर बाजार का जानकार है, जबकि दूसरा पहले कॉल सेंटर में काम कर चुका है. बाकी दो आरोपी कॉलिंग एक्सपर्ट हैं और अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ रखते हैं.
पुलिस का मानना है कि इन्हीं क्षमताओं का इस्तेमाल कर आरोपी विदेशी नागरिकों का विश्वास जीतते थे और उन्हें फर्जी लोन ऑफर के नाम पर ठगते थे.
करण लोकवानी और जोनाथन दास बताए जा रहे मास्टरमाइंड
पुलिस जांच में करण लोकवानी और जोनाथन दास को इस पूरे रैकेट का मुख्य साजिशकर्ता माना जा रहा है. आरोप है कि दोनों ने अन्य युवकों को इस तरह की कॉलिंग और लोगों को फंसाने का प्रशिक्षण दिया था.
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने इस तरह की ठगी का तरीका विभिन्न वेब सीरीज और ऑनलाइन कंटेंट देखकर सीखा था. बाद में उन्होंने उसी मॉडल पर अपना फर्जी कॉल सेंटर खड़ा कर लिया.
फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने अब तक कितने अमेरिकी नागरिकों को अपना शिकार बनाया और कुल कितनी रकम की ठगी की गई.
35 लाख रुपये का सामान और उपकरण जब्त
छापेमारी के दौरान पुलिस ने कॉल सेंटर संचालन में इस्तेमाल होने वाले कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए हैं. इनमें 7 मोबाइल फोन, 8 लैपटॉप, एक फाइबर वाई-फाई राउटर और अन्य तकनीकी उपकरण शामिल हैं.
इसके अलावा पुलिस ने नकदी और अन्य सामग्री समेत करीब 35 लाख रुपये मूल्य का सामान जब्त किया है. सभी उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि ठगी के नेटवर्क की पूरी जानकारी सामने आ सके.
पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और साइबर ठगी के इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी शुरू कर दी है.
—- समाप्त —-
गुजरात के वडोदरा में पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा किया है. वडोदरा एलसीबी जोन-2 की टीम ने अकोटा इलाके में चल रहे एक फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर पर छापा मारकर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपी वडोदरा में बैठकर अमेरिकी नागरिकों को लोन मंजूर होने का झांसा देते थे और उनसे डॉलर में रकम वसूलते थे.
पुलिस के मुताबिक, यह अवैध कॉल सेंटर अकोटा क्षेत्र स्थित प्रधानजी की चाल के पास बेरील अपार्टमेंट में संचालित किया जा रहा था. यहां से आरोपी विदेश में रहने वाले लोगों को कॉल कर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे थे. मामले की सूचना मिलने के बाद एलसीबी जोन-2 की टीम ने छापेमारी कर पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया.
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जांच में सामने आया कि आरोपी बिना किसी लाइसेंस या वैधानिक अनुमति के अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग का काम कर रहे थे. वे अमेरिकी नागरिकों से संपर्क कर उन्हें बताते थे कि उनका लोन मंजूर हो चुका है और आगे की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कुछ शुल्क जमा करना होगा.
लोन के नाम पर वसूले जाते थे 150 से 200 डॉलर
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे खुद को वित्तीय संस्था “सिटी क्रेडिट्स” का प्रतिनिधि बताकर अमेरिकी नागरिकों को कॉल करते थे. कॉल के दौरान वे भरोसा जीतने के लिए धाराप्रवाह अंग्रेजी का इस्तेमाल करते थे.
इसके बाद पीड़ितों से उनके डेबिट कार्ड का नंबर, कार्ड की समाप्ति तिथि और सीवीवी जैसी गोपनीय जानकारी हासिल की जाती थी. जानकारी मिलने के बाद उनसे 150 से 200 डॉलर तक की फीस वसूली जाती थी.
पुलिस का कहना है कि आरोपी सुनियोजित तरीके से लोगों को झांसे में लेते थे और ऑनलाइन माध्यम से रकम हासिल करते थे. शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि यह नेटवर्क पिछले दो महीनों से सक्रिय था.
डार्क वेब से जुटाते थे अमेरिकी नागरिकों के नंबर
डीसीपी जोन-2 मंजिता वंजारा के अनुसार, आरोपियों के पास विदेशी नागरिकों के संपर्क नंबर डार्क वेब के जरिए पहुंचते थे. इन्हीं नंबरों पर कॉल कर वे अपने ठगी के जाल को फैलाते थे.
जांच में पता चला कि गिरफ्तार आरोपियों में एक व्यक्ति शेयर बाजार का जानकार है, जबकि दूसरा पहले कॉल सेंटर में काम कर चुका है. बाकी दो आरोपी कॉलिंग एक्सपर्ट हैं और अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ रखते हैं.
पुलिस का मानना है कि इन्हीं क्षमताओं का इस्तेमाल कर आरोपी विदेशी नागरिकों का विश्वास जीतते थे और उन्हें फर्जी लोन ऑफर के नाम पर ठगते थे.
करण लोकवानी और जोनाथन दास बताए जा रहे मास्टरमाइंड
पुलिस जांच में करण लोकवानी और जोनाथन दास को इस पूरे रैकेट का मुख्य साजिशकर्ता माना जा रहा है. आरोप है कि दोनों ने अन्य युवकों को इस तरह की कॉलिंग और लोगों को फंसाने का प्रशिक्षण दिया था.
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने इस तरह की ठगी का तरीका विभिन्न वेब सीरीज और ऑनलाइन कंटेंट देखकर सीखा था. बाद में उन्होंने उसी मॉडल पर अपना फर्जी कॉल सेंटर खड़ा कर लिया.
फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने अब तक कितने अमेरिकी नागरिकों को अपना शिकार बनाया और कुल कितनी रकम की ठगी की गई.
35 लाख रुपये का सामान और उपकरण जब्त
छापेमारी के दौरान पुलिस ने कॉल सेंटर संचालन में इस्तेमाल होने वाले कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए हैं. इनमें 7 मोबाइल फोन, 8 लैपटॉप, एक फाइबर वाई-फाई राउटर और अन्य तकनीकी उपकरण शामिल हैं.
इसके अलावा पुलिस ने नकदी और अन्य सामग्री समेत करीब 35 लाख रुपये मूल्य का सामान जब्त किया है. सभी उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि ठगी के नेटवर्क की पूरी जानकारी सामने आ सके.
पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और साइबर ठगी के इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी शुरू कर दी है.
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