प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपनी मांगों को पुरा कराने के लिए, एक साधु ने शुरु की दंडवत यात्रा – पुजारी राहुल शर्मा

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सरकार से लोग अपनी बात को मनाने के लिए लोग कईं तरिकों का इस्तेमाल करते हैं। कुछ लोग अपनी बात कहने के लिए इंटरनेट का सहारा लेते है, तो कुछ लोग आंदोलन करके अपनी बात सरकार तक पहुंचाते है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे इंसान के बारे में बता रहे हैं जो अपनी बात को प्रधानमंत्री से मनवाने के लिए पिछले 89 दिनों से दंडवत यात्रा कर रहा है, ताकी प्रधानमंत्री से मिलकर अपनी बात मनवाई जाए। दरअसल में यह शख़्स पुजारी राहुल शर्मा है जो उत्तर प्रदेश के बदायु जिले से है उन्होंने 22 मई 2018 से अपनी दंडवक्त यात्रा शुरु की है और इस यात्रा को शुरु किए हुए उन्हें 89 दिन हो गए हैं।

पुजारी राहुल शर्मा प्रधानमंत्री मोदी से मिलना चाहते है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर वे अपनी उन 6 मांगों को पुरा करवाना चाहते है जिनके लिए वह दंडवत यात्रा कर रहें हैं। उनकी पहली मांग है की देश के अंदर आरक्षण सिर्फ़ आर्थिक स्थिति की बुनियाद पर दिया जाए वरना बंद किया जाए। उनकी दुसरी मांग है की किसान कोई भी हो छोटा हो या बड़ा हो कर्ज़ माफ़ी का नियम सभी किसानों पर एक समान लागू हो वरना कर्ज़ माफ़ी को बंद किया जाए। पुजारी राहुल शर्मा की तीसरी मांग है की सरकार दावा करती है की विकलागों और भीख मांगने वाले बच्चों के लिए सरकार नें हर जिलें में अनाथ आश्रम खोल रखे है फिर भी लोग और बच्चे भीग मांग रहे है इसको रोकने के लिए सरकार ठोस कानून लागू करें।

चोथी मांग में पुजारी राहुल शर्मा नें कहा की वृदा आश्रम में ऐसे लोग जाए जिनके पास कोई संपत्ति और बच्चे न हो, जो बच्चे अपने मां बाप को छोड देते है उन्हें पांच साल की सजा सुनाई जाए। जो जवान बॉर्डर पर शहीद हो रहे है उनके बच्चों को जब तक दुसरा पिता नहीं मिलता तब तक सरकार उनकी शिक्षा का पूरा खर्चा दे, मरे हुए जवान की पत्नी अगर दुसरी शादी करती है तो ऐसी स्थिति में उस विधवा महिला की पेंशन रद्द की जाए यह राहुल पुजारी की पांचवी मांग है। उनकी छठी और अंतिम मांग है की सरकार हर डिर्पाटमेंट में लोगों के काम करने का समय निर्धारित करें और आख़िर में राहुल पुजारी नें सरकार से कहा की चाहे हिंदु हो या मुस्लिम जनसंख्या पर सरकार नियत्रंण लगाए। तो इस तरह से यह शख़्स अपनी 6 मांगों को मनवाने के लिए बिना वाहन के पिछले 89 दिनों से यात्रा कर रहे हैं।