रामायण में सीता की शादी के लिए शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त ही क्यों रखी ?

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रामायण
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रामायण भगवान राम और माता सीता की कहानी है, जिसमें भगवान राम को जिस दिन राजतिलक होना था. उसी दिन उनके पिता द्वारा 14 वर्षों के वनवास का आदेश दिया जाता है. वनवास के दौरान सीता माता को लंका का राजा रावण लंका में ले जाता है. जिसके बाद भगवान श्रीराम रावण का वध करके सीता माता को वापस ले आते हैं. इस कथा के बारे में तो आप जानते होगें.

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लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब भगवान राम की शादी माता सीता से हुई तो उस समय एक शर्त रखी गई थी कि जो भी शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा उसके साथ ही माता सीता की शादी की जाएगी. लेकिन यहीं शर्त क्यों रखी गई थी. इस पोस्ट में आपको इस सवाल का जवाब भी मिल जाएगा.

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सीता के पिता जनक के पास एक शिव धनुष था. जिसको उठा पाना बड़े-बड़े यौद्धाओं के लिए भी संभव नहीं था. लेकिन सीता बचपन में जब वहां की साफ-सफाई करती या खेलती थी तो उस धनुष को आसानी से उठाकर दूसरे स्थान पर रख देती थी. इसी कारण राजा जनक को लगा कि जब उसकी बेटी इस धनुष को उठा लेती है, तो उसके लिए वहीं सुयोग्य वर हो सकता है, जो इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा दे. इसी कारण जब सीता का स्वंयवर रखा गया, तो उसमें शर्त रखी गई कि जो भी इस धनुष की प्रत्यंचा को चढ़ा देगा. उसी के साथ सीता की शादी की जाएगी.

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भगवान श्रीराम जब धनुष उठाते हैं, तो वह टूट जाता है. जिसके बाद सीता भगवान राम के गले में वरमाला ड़ाल देती है. इस तरह इस स्वयंवर के माध्यम से सीता माता और भगवान राम की शादी होती है.