भारत और विसेग्राड-4 समूह की ऐतिहासिक बैठक, UNSC में स्थायी सदस्यता का मिला खुला समर्थन
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मध्य यूरोप के चार देशों के समूह 'विसेग्राड-4' (V4) के साथ अपनी पहली बैठक की है, जिसे आपसी संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक में…
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मध्य यूरोप के चार देशों के समूह 'विसेग्राड-4' (V4) के साथ अपनी पहली बैठक की है, जिसे आपसी संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक में V4 समूह ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता का पुरजोर समर्थन किया और भारत को एक 'उभरती हुई महाशक्ति' बताया।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बैठक स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार की पहल पर आयोजित की गई। ब्लानार ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, "हम चारों देश इस बात पर सहमत हैं कि ग्लोबल साउथ का हिस्सा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उभरती हुई सुपरपावर भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य के तौर पर जगह मिलनी चाहिए।"
सहयोग के नए रास्ते
बैठक में भारत और V4 देशों—जिसमें स्लोवाकिया, हंगरी, पोलैंड और चेक रिपब्लिक (चेकिया) शामिल हैं—ने कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि हर साल एक बिजनेस फोरम आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा, दोनों पक्षों के विदेश मंत्री भी हर साल मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा, "चूंकि यूरोपीय संघ के साथ भारत के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं, इसलिए हम V4 देशों के साथ भी कुछ खास पहल करेंगे।"
रक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में पुराने संबंधों को नई ऊर्जा देने पर भी जोर दिया गया। एस. जयशंकर ने कहा, "रक्षा के क्षेत्र में V4 के सभी देशों के साथ हमारा बहुत मजबूत इतिहास रहा है। हम इस पुराने सहयोग को फिर से नई रफ्तार देना और आगे बढ़ाना चाहते हैं।" उन्होंने V4 देशों को मजबूत औद्योगिक अर्थव्यवस्था बताते हुए इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुआ?
इस उच्च-स्तरीय बैठक में एस. जयशंकर के साथ हंगरी की उप प्रधानमंत्री अनीता ओरबान, पोलैंड के उप प्रधानमंत्री राडेक सिकोरस्की और चेक रिपब्लिक के उप प्रधानमंत्री पेट्र माकिंका ने अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व किया। गौरतलब है कि विसेग्राड समूह का नाम हंगरी के शहर विसेग्राद पर रखा गया है, जहां 1991 में इन देशों के नेताओं की पहली बैठक हुई थी। जयशंकर ने हंगरी और स्लोवाकिया के अपने समकक्षों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी कीं।
इनपुट: IANS



