अहम खनिजों के लिए अमेरिका और इटली ने मिलाया हाथ, रीसाइक्लिंग पर रहेगा खास ज़ोर
आधुनिक टेक्नोलॉजी, रक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के लिए बेहद ज़रूरी माने जाने वाले 'क्रिटिकल मिनरल्स' यानी अहम खनिजों की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए अमेरिका और इटली ने एक महत्वपूर्ण समझौते पर…
आधुनिक टेक्नोलॉजी, रक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के लिए बेहद ज़रूरी माने जाने वाले 'क्रिटिकल मिनरल्स' यानी अहम खनिजों की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए अमेरिका और इटली ने एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य इन खनिजों की रीसाइक्लिंग और दोबारा इस्तेमाल के लिए उन्हें हासिल करने पर आपसी सहयोग बढ़ाना है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों की नई खदानों पर निर्भरता कम करने की रणनीति का हिस्सा है।
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और इटली के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने हस्ताक्षर किए। इस पहल के तहत एक साझा वर्किंग ग्रुप का गठन किया जाएगा, जो दोनों देशों के बीच ठोस सहयोग को ज़मीनी स्तर पर आगे बढ़ाने का काम करेगा।
समझौते का मुख्य फोकस
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, यह समझौता सिर्फ नई खदानों से खनिज निकालने पर केंद्रित नहीं है, बल्कि इस्तेमाल हो चुके उत्पादों, औद्योगिक कचरे और अन्य मौजूदा स्रोतों से कीमती खनिजों को निकालकर दोबारा उपयोग में लाने पर विशेष ध्यान देगा। इस कदम से कुछ ही देशों में केंद्रित मिनरल प्रोसेसिंग नेटवर्क पर निर्भरता घट सकती है और घरेलू स्तर पर संसाधनों का एक अतिरिक्त स्रोत तैयार हो सकता है।
जिन अहम खनिजों पर यह सहयोग केंद्रित हो सकता है, उनमें बैटरी, सेमीकंडक्टर, रक्षा प्रणाली और बिजली के बुनियादी ढांचे में इस्तेमाल होने वाले खनिज शामिल हैं। हालांकि, विभाग ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि कौन-से विशिष्ट क्षेत्र इस समझौते के दायरे में आएंगे।
रणनीतिक महत्व और भविष्य की राह
अहम खनिज किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य होते हैं, जिनकी सप्लाई में रुकावट का खतरा बना रहता है। इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग के साथ इन खनिजों का महत्व और भी बढ़ गया है। इस बातचीत में रणनीतिक उद्योगों को विरोधी देशों द्वारा अधिग्रहण से बचाने और सप्लाई चेन के लिए अलग-अलग स्रोत तैयार करने पर भी चर्चा हुई।
इस समझौते का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नवगठित वर्किंग ग्रुप भविष्य में किस तरह की परियोजनाएं, नीतियां और निवेश सामने लाता है। भारत भी अहम खनिजों के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बढ़ा रहा है, इसलिए इस अमेरिकी-इतालवी सहयोग पर उसकी भी नजर रहेगी।
इनपुट: IANS



