इंडियन ओवरसीज बैंक से ₹117 करोड़ की धोखाधड़ी, ED ने चेन्नई-तिरुप्पुर में 6 ठिकानों पर मारे छापे
इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) से करीब 117 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, ईडी की चेन्नई जोनल ऑफिस-II की टीम…
इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) से करीब 117 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, ईडी की चेन्नई जोनल ऑफिस-II की टीम ने धन-शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत चेन्नई और तिरुप्पुर में छह ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई पीजीसी कॉर्पोरेशन लिमिटेड और उसके निदेशकों के खिलाफ चल रही जांच का हिस्सा है।
यह पूरा मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की आर्थिक अपराध शाखा (EOB), चेन्नई द्वारा दर्ज एक FIR पर आधारित है। FIR में पीजीसी कॉर्पोरेशन लिमिटेड के निदेशकों डी. प्रेम, आदित्य डी. विक्रम और के. कालीस्वरन के साथ-साथ कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों व निजी व्यक्तियों पर बैंक के साथ लगभग 116.79 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था।
जाली दस्तावेज़ और फंड का दुरुपयोग
जांच के मुताबिक, कंपनी ने इंडियन ओवरसीज बैंक से कई तरह की ऋण सुविधाएं हासिल की थीं। आरोप है कि ज्यादा क्रेडिट लिमिट पाने के लिए कंपनी ने वित्त वर्ष 2011-12 के लिए बैंक को गलत और हेरफेर किए गए वित्तीय विवरण दिए थे। बाद में, बैंक ने 2013 में कंपनी के खाते को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) और 2020 में इसे 'धोखाधड़ी वाला खाता' घोषित कर दिया था।
ईडी का आरोप है कि ऋण के रूप में मिले पैसों का दुरुपयोग किया गया और इसका एक हिस्सा निजी बैंक खातों तथा विदेशी कंपनियों को भेजा गया। जांच एजेंसी ने फंड की 'राउंड ट्रिपिंग' का भी पता लगाया है, जिसमें विदेश भेजी गई रकम का एक बड़ा हिस्सा वापस भारत लाकर स्थानीय व्यापारिक खर्चों में इस्तेमाल किया गया।
छापेमारी में क्या मिला?
ईडी अधिकारियों ने बताया कि तलाशी अभियान के दौरान करीब 82 लाख रुपए की बेहिसाबी नकदी, दो लग्जरी गाड़ियां, डिजिटल उपकरण (लैपटॉप, पेन ड्राइव, मोबाइल फोन), संपत्ति के दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक कागजात जब्त किए गए हैं। इसके अलावा, आरोपियों की आलीशान जीवनशैली और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद संपत्तियों से जुड़ी जानकारी भी मिली है।
एजेंसी ने यह भी पाया कि जब बैंक ने ऋण वसूली की प्रक्रिया शुरू की, तो पीजीसी कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने लगभग 235 करोड़ रुपए की अपनी इन्वेंट्री को संबंधित कंपनियों को बेच दिया। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने अपने जीवनसाथियों और कर्मचारियों के नाम पर नए व्यवसाय शुरू किए थे, लेकिन उनका असली नियंत्रण उन्हीं के हाथों में था। मामले में आगे की जांच जारी है।
इनपुट: IANS



