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महोबा- दस साल से अधूरी पड़ी अर्जुन सहायक परियोजना, अभी तक आधा भी नहीं हो पाया है काम

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महोबा: दैवी आपदा की मार झेल रहें हमीरपुर, महोबा और बांदा जिले के किसानों को सिंचाई देने के लिए बनाई गई अर्जुन सहायक परियोजना सर्किल रेट के विवाद की वजह से अधर पर लटक गई है.

लंब वक्त से अधूरी पड़ी इस परियोजना को मार्च 2020 तक पूरे करने का लक्ष्य सोचा गया है

बता दें कि इस परियोजना का कार्य काफी धीमी गति के चलते लागत दस साल में 804 करोड़ रूपये से 2600 करोड़ रूपये पहुंच गई है. लंब वक्त से अधूरी पड़ी इस परियोजना को मार्च 2020 तक पूरे करने का लक्ष्य सोचा गया है. साल 1978 में देवरी बांध से अर्जुन बांध से होते हुए चंद्रावल बांध, कबरई बांध और फिर केन नदी तक जोड़ने वाली अर्जुन सहायक बांध परियोजना बनाई गई थी.

साल 2008 में केंद्र तथा राज्य सरकार ने 806 करोड़ वाली इस बड़ी परियोजना को मंजूरी दी थी

यह परियोजना तीस वर्ष तक सिंचाई विभाग की अलमारियों में पड़ी-पड़ी धूल खा रहीं थी. तत्कलीन खनिज राज्यमंत्री सिद्धगोपाल साहू ने इस योजना कराकर शासन भिजवाया. साल 2008 में केंद्र तथा राज्य सरकार ने 806 करोड़ वाली इस बड़ी परियोजना को मंजूरी दी थी. जैसे इस परियोजना को पहली किस्त मिली तो सिंचाई विभाग ने मौदहा बांध निर्माण खंड प्रथम ने साल 2009-2010 में झांसी और कोलकाता के कंपनी के पक्ष में अनुबंध गठित कर कार्य करना शुरू कर दिया.

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लेकिन जमीन के सर्किल रेट बाजार रेट से बहुत कम होने की वजह से किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया. ये ही वजह है कि दस साल से कार्य गति नहीं पकड़ पाया, इस कारण से परियोजना की लागत तीन गुना से अधिक बढ़ा गई. आपको बता दें कि अर्जुन सहायक परियोजना के अनुरूप झांसी की घनाराम कंपनी को 1144 करोड़ रूपये की लागत से कबरई बांध उच्चीकरण, एप्रोच रोड बनाने, फटाक लगाने, आदि समेत कई कार्य दिए गए तो जो जो आज तक आधा भी नहीं किया जा सका.

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इसके अतिरिक्त किसानों ककी भूमि अधिग्रहण वालीं क्षेत्रों तथा सरकारी भूमि पर भी कार्य नहीं हो सका. वहीं किसान अपनी जमींन का मुआवजा सर्किल रेट से भी अधिक मांग रहें है. ये भी एक कारण है कि परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रहीं है. अब परियोजना में धन की कमी भी अड़े आ रही है.

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