सारनाथ अब यूनेस्को की विश्व धरोहर, PM मोदी और उपराष्ट्रपति ने कहा- यह हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण
भारत की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर सारनाथ को एक बड़ी वैश्विक पहचान मिली है। उत्तर प्रदेश स्थित इस प्राचीन बौद्ध स्थल को यूनेस्को (UNESCO) ने अपनी विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया है। समाचार…
भारत की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर सारनाथ को एक बड़ी वैश्विक पहचान मिली है। उत्तर प्रदेश स्थित इस प्राचीन बौद्ध स्थल को यूनेस्को (UNESCO) ने अपनी विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस प्रतिष्ठित सम्मान की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने इसे पूरे देश के लिए गौरव का क्षण बताया है।
सारनाथ का बौद्ध धर्म में विशेष स्थान है, क्योंकि माना जाता है कि ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश यहीं दिया था। इस घटना को 'धर्मचक्र प्रवर्तन' के नाम से जाना जाता है। यूनेस्को ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सारनाथ को विश्व धरोहर का दर्जा देने की आधिकारिक घोषणा की, जिसके बाद यह दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों और इतिहास प्रेमियों के लिए और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
शीर्ष नेतृत्व ने जताई खुशी
इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश स्थित सारनाथ का भगवान बुद्ध से गहरा संबंध रहा है और उनके ज्ञान, करुणा तथा सद्भाव का कालजयी संदेश आज भी पूरी दुनिया को प्रेरित करता है।" प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि इस वैश्विक मान्यता से और अधिक लोग सारनाथ आकर भगवान बुद्ध की शिक्षाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे।
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी इसे अत्यंत गर्व का क्षण बताते हुए सारनाथ को शांति, ज्ञान और करुणा का स्थायी प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि भारत की प्राचीन सभ्यता और उसके आध्यात्मिक विचार आज भी पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
विश्व पटल पर बढ़ेगा महत्व
सारनाथ सदियों से दुनिया भर के बौद्ध श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आस्था और अध्ययन का एक प्रमुख केंद्र रहा है। यूनेस्को की सूची में शामिल होने के बाद अब इसकी वैश्विक पहचान और मजबूत होने की उम्मीद है। इस कदम से न केवल अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण प्रयासों को भी नई गति मिलेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।
इनपुट: IANS



