रविवार, 6 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
संस्कृति

3000 साल पुरानी 'ली ब्रोकेड' कला को मिला आधुनिक रंग, युवाओं के बीच बन रही नई पहचान

चीन के वस्त्र इतिहास का 'जीवित जीवाश्म' कही जाने वाली करीब 3,000 साल पुरानी 'ली ब्रोकेड' बुनाई कला अब एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। दक्षिण चीन के हैनान प्रांत की यह पारंपरिक विरासत अब सिर्फ…

3000 साल पुरानी 'ली ब्रोकेड' कला को मिला आधुनिक रंग, युवाओं के बीच बन रही नई पहचान
(फोटो: IANS)

चीन के वस्त्र इतिहास का 'जीवित जीवाश्म' कही जाने वाली करीब 3,000 साल पुरानी 'ली ब्रोकेड' बुनाई कला अब एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। दक्षिण चीन के हैनान प्रांत की यह पारंपरिक विरासत अब सिर्फ पारंपरिक परिधानों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि आधुनिक उत्पादों के ज़रिए युवा पीढ़ी की ज़िंदगी का हिस्सा बन रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस प्राचीन कला को नवाचार के साथ जोड़कर इसे वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दी जा रही है।

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ली जातीय समूह की कताई, रंगाई, बुनाई और कढ़ाई की इस अनूठी परंपरा को दिसंबर 2024 में यूनेस्को ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया था। इस वैश्विक मान्यता ने इस कला को और मजबूती दी है। आज ली ब्रोकेड से 100 से भी ज़्यादा तरह के रचनात्मक उत्पाद बनाए जा रहे हैं, जिनमें बैग, स्कार्फ, गहने, नोटबुक और फोन कवर जैसी आधुनिक वस्तुएं शामिल हैं।

परंपरा और आधुनिकता का संगम

ली ब्रोकेड की खासियत यह है कि इसमें परंपरा और आधुनिक सौंदर्यबोध का अनूठा मेल देखने को मिलता है, जिसने युवा उपभोक्ताओं को अपनी ओर खींचा है। इस कला को सिर्फ संग्रहालयों की वस्तु बनाकर रखने के बजाय इसे नई पीढ़ी की ज़रूरतों और जीवनशैली से जोड़ा गया है। इससे न केवल हज़ारों साल पुरानी संस्कृति जीवित रह रही है, बल्कि युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई उड़ान

यह प्राचीन कला अब चीन की सीमाओं से बाहर निकलकर अंतरराष्ट्रीय फैशन जगत में भी अपनी जगह बना रही है। 2021 से ली ब्रोकेड को देश-विदेश के फैशन वीक के रनवे पर प्रदर्शित किया जा रहा है। मामले को और गंभीरता से लेते हुए, अगस्त 2023 में वुझिशान शहर ने इटली के प्रसिद्ध फैशन संस्थान 'इस्टिटूटो मारंगोनी' के साथ एक साझेदारी की। इस समझौते के तहत प्रतिभाशाली बुनकरों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है।

इस विरासत को भविष्य में भी ज़िंदा रखने के लिए वुझिशान शहर में बड़े पैमाने पर प्रयास किए जा रहे हैं। यहां अगली पीढ़ी को प्रशिक्षित करने के लिए 22 प्रशिक्षण एवं अभ्यास केंद्र और सात अमूर्त सांस्कृतिक विरासत कार्यशालाएं स्थापित की गई हैं। यह नई यात्रा साबित करती है कि जब परंपरा नवाचार से मिलती है, तो वह भविष्य के विकास की ताकत बन जाती है।

इनपुट: IANS

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News4Social धर्म-संस्कृति डेस्क

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