एटा: नाबालिगों से आपत्तिजनक वीडियो बनवाने का मामला गरमाया, NHRC ने पुलिस और मेटा से मांगा जवाब
उत्तर प्रदेश के एटा जिले में एक कोचिंग संस्थान की आड़ में नाबालिग बच्चों से आपत्तिजनक और स्क्रिप्टेड सोशल मीडिया वीडियो बनवाने का गंभीर मामला सामने आया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस प्रकरण पर…
उत्तर प्रदेश के एटा जिले में एक कोचिंग संस्थान की आड़ में नाबालिग बच्चों से आपत्तिजनक और स्क्रिप्टेड सोशल मीडिया वीडियो बनवाने का गंभीर मामला सामने आया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस प्रकरण पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। आयोग ने इसे बच्चों के अधिकारों का घोर उल्लंघन मानते हुए जिला प्रशासन और सोशल मीडिया कंपनी मेटा (फेसबुक) समेत कई पक्षों को नोटिस जारी किया है।
यह कार्रवाई एक शिकायत के बाद हुई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एक तथाकथित कोचिंग सेंटर छोटे बच्चों का इस्तेमाल राजनीतिक रूप से संवेदनशील और आपत्तिजनक वीडियो बनाने के लिए कर रहा है। शिकायत में कहा गया कि इससे बच्चों की गरिमा, निजता और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है और यह सब बिना अभिभावकों की सहमति के किया जा रहा है।
पुलिस और मेटा को कड़े निर्देश
एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। आयोग ने एटा के एसएसपी, जिलाधिकारी, मेटा इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव को नोटिस भेजकर दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) तलब की है।
आयोग ने एटा पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रभावित बच्चों की पहचान कर उनकी सुरक्षा और काउंसलिंग सुनिश्चित की जाए। साथ ही, जरूरत पड़ने पर उन्हें बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। एनएचआरसी ने कहा है कि जांच का मुख्य फोकस उन वयस्कों पर होना चाहिए जो इन वीडियो की स्क्रिप्टिंग, रिकॉर्डिंग और अपलोडिंग के पीछे हैं। अगर कोई संज्ञेय अपराध पाया जाता है, तो तुरंत FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भूमिका पर सवाल
आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए हैं। मेटा इंडिया से पूछा गया है कि नाबालिगों से जुड़े ऐसे कंटेंट को बार-बार अपलोड और प्रसारित होने से क्यों नहीं रोका गया। NHRC ने यह भी जानना चाहा है कि क्या इस कंटेंट से कोई व्यावसायिक लाभ कमाया गया और इससे जुड़े डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
एनएचआरसी ने अपने आदेश में साफ किया है कि इस मामले में बच्चों को पीड़ित के तौर पर देखा जाए, जिन्हें संरक्षण की जरूरत है। जांच के दौरान उनकी पहचान और गरिमा की हर हाल में रक्षा की जानी चाहिए।
इनपुट: IANS



