सूखा राहत: शिवसेना (UBT) ने सरकार से कहा- जनता से नहीं, बिचौलियों-ठेकेदारों से वसूलें पैसा
महाराष्ट्र में सूखे के संकट से निपटने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आम नागरिकों से अपने निजी उत्सवों का खर्च कम कर राहत कोष में दान करने की अपील की है। इस पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे)…
महाराष्ट्र में सूखे के संकट से निपटने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आम नागरिकों से अपने निजी उत्सवों का खर्च कम कर राहत कोष में दान करने की अपील की है। इस पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में इस अपील को 'खाली जेबों से पैसे निकालना' जैसा बताया और कहा कि आर्थिक तंगी से जूझ रही जनता से ऐसी उम्मीद करना असंवेदनशील है।
पार्टी ने कहा कि नागरिकों को शादी और नामकरण जैसे समारोहों में कटौती करने की सलाह देने के बजाय, सरकार को अपने तंत्र में फैले भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और ठेकेदारों को दिए जाने वाले कमीशन पर लगाम लगानी चाहिए।
किसानों की आत्महत्या और सरकारी जिम्मेदारी
संपादकीय में राज्य के बिगड़ते कृषि संकट पर चिंता जताते हुए बताया गया कि परभणी, यवतमाल, सोलापुर और हिंगोली जैसे जिलों में सिर्फ दो दिनों के भीतर चार किसानों ने कर्ज और सूखे की मार से तंग आकर आत्महत्या कर ली। शिवसेना (यूबीटी) ने चेतावनी दी कि अगर राज्य सरकार ने तत्काल सीधी मदद नहीं पहुंचाई तो सूखाग्रस्त इलाके 'कब्रिस्तान' में बदल सकते हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री और उनके प्रशासन की होगी।
फंड जुटाने के लिए सरकार को दिए सुझाव
ठाकरे गुट ने सरकार को सूखा राहत के लिए फंड जुटाने के कई वैकल्पिक रास्ते भी सुझाए। पार्टी ने विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाया, जिसमें कोंकण क्षेत्र में तटीय भूमि की बिक्री और शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे से जुड़े फंड का उल्लेख किया गया। संपादकीय में कहा गया है कि सरकार को इस तरह की फिजूलखर्ची रोकनी चाहिए।
सुझावों में शामिल हैं:
- राजनीतिक दल-बदल और चुनाव प्रचार पर होने वाले खर्च को किसानों की मदद में लगाया जाए।
- मुंबई के बड़े बिल्डरों, एसआरए डेवलपर्स और वरिष्ठ नौकरशाहों से अनिवार्य रूप से बड़ा योगदान लिया जाए।
- पीएम केयर्स फंड से महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र के लिए 2,000 से 4,000 करोड़ रुपये की मांग की जाए।
पार्टी ने मंत्रियों द्वारा एक महीने का वेतन दान करने जैसे सांकेतिक कदमों को महज दिखावा करार दिया। संपादकीय में जोर देकर कहा गया कि असली राहत तब मिलेगी जब सरकार भ्रष्ट अधिकारियों, ठेकेदारों और राजनीतिक बिचौलियों के गठजोड़ पर कार्रवाई करेगी।
इनपुट: IANS



