दानम नागेंदर की अयोग्यता बरकरार, BRS ने राहुल-रेवंत पर साधा निशाना
दल-बदल विरोधी कानून के तहत खैरताबाद के पूर्व विधायक दानम नागेंदर की अयोग्यता को तेलंगाना हाईकोर्ट ने सही ठहराया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उस फैसले को बरकरार रखा है, जिससे नागेंदर की याचिका खारिज हो…
दल-बदल विरोधी कानून के तहत खैरताबाद के पूर्व विधायक दानम नागेंदर की अयोग्यता को तेलंगाना हाईकोर्ट ने सही ठहराया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उस फैसले को बरकरार रखा है, जिससे नागेंदर की याचिका खारिज हो गई है। इस न्यायिक घटनाक्रम पर भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, BRS के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (KTR) ने इसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के लिए एक "करारा थप्पड़" बताया है।
शीर्ष अदालत ने नागेंदर की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय के निर्णय में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। इसी फैसले को आधार बनाते हुए BRS नेताओं ने कांग्रेस पर दल-बदल को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।
KTR का कांग्रेस पर तीखा प्रहार
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए KTR ने लिखा कि दानम नागेंदर की अयोग्यता से बचने की कोशिश नाकाम हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और रेवंत रेड्डी यह सोचते थे कि वे दल-बदल के जरिए जनता के जनादेश को "चुरा" सकते हैं और विधानसभा अध्यक्ष के पद का इस्तेमाल कर इसे बचा सकते हैं। KTR ने राहुल गांधी को "एमएलए चोर" कहते हुए उन पर सीधा निशाना साधा।
KTR ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने स्पीकर कार्यालय के माध्यम से दल-बदल को संरक्षण देने के प्रयासों को उजागर कर दिया है। उन्होंने खैरताबाद में संभावित उपचुनाव की ओर इशारा करते हुए कहा कि जनता जल्द ही "तीन साल के विश्वासघात, टूटे वादों और कुशासन" पर अपना निर्णय देगी। उन्होंने यह भी कहा, "एक विकेट गिर चुका है, जल्द ही और भी गिरेंगे।"
हरीश राव ने भी उठाए सवाल
BRS के एक अन्य वरिष्ठ नेता और विधानसभा में पार्टी के उपनेता टी. हरीश राव ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने इसे "संविधान बचाओ" का नारा देने वाली कांग्रेस के दोहरे रवैये पर एक बड़ा प्रहार बताया।
हरीश राव ने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे सच में संविधान में विश्वास रखते हैं, तो उन्हें कांग्रेस में शामिल हुए सभी दलबदलू विधायकों से तुरंत इस्तीफा दिलवाना चाहिए और उन्हें फिर से जनता का जनादेश लेने के लिए भेजना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि दिल्ली में संवैधानिक नैतिकता की बात करना और तेलंगाना में अपनी ही पार्टी के आचरण पर चुप रहना क्या दोहरा मापदंड नहीं है।
इनपुट: IANS



