मतदाता सूची विवाद: कांग्रेस ने 13 करोड़ वोटर हटाने का लगाया आरोप, चुनाव आयोग पर उठाए गंभीर सवाल
कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इशारे पर काम करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) अभियान के तहत देश के 19 राज्यों में मतदाता…
कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इशारे पर काम करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) अभियान के तहत देश के 19 राज्यों में मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ लोगों के नाम हटा दिए गए हैं, जिसमें अकेले कर्नाटक से 1.43 करोड़ मतदाता शामिल हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने गुरुवार को यह आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
सुरजेवाला ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की नींव है और पात्र नागरिकों को मतदाता सूची से हटाना उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने आरोप लगाया कि जून 2025 से चलाए जा रहे एसआईआर अभियान के जरिए जानबूझकर पात्र मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है, जिसे उन्होंने एक अभूतपूर्व कार्रवाई बताया।
चुनाव आयोग के भीतर मतभेद का दावा
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग का कामकाज मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के हाथों में सिमट गया है। उनके अनुसार, अन्य दो चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और संचार पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि एसआईआर से संबंधित सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस ने कई मांगें रखी हैं। रणदीप सुरजेवाला ने एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की है। उनकी अन्य मांगों में शामिल हैं:
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाया जाए और आरोप साबित होने पर आपराधिक कार्रवाई हो।
- जून 2025 से अब तक हटाए गए सभी मतदाताओं के मामलों की व्यापक समीक्षा की जाए।
- चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर प्रक्रिया पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए।
- निर्वाचन नामावली डेटाबेस का एक स्वतंत्र आईटी और साइबर फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए।
- बिहार और पश्चिम बंगाल में हुए चुनावों की वैधता की समीक्षा की जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जनादेश एक वैध मतदाता सूची पर आधारित था।
इसके अलावा, सुरजेवाला ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलावों की भी आलोचना की, जिससे युवाओं के लिए प्रक्रिया जटिल हो सकती है। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां पहले से सूची में शामिल मतदाताओं के खिलाफ 16 लाख अपीलें दायर की गईं। वहीं, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि राज्य में कुल 38.31 लाख अपीलें आईं, जिनमें 16.10 लाख नाम हटाने से संबंधित थीं।
इनपुट: IANS



