चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग, वाम दल 26 सितंबर से करेंगे देशव्यापी प्रदर्शन
देश के तीन वामपंथी दलों ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के…
देश के तीन वामपंथी दलों ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन मांगों को लेकर वाम दल 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक देशभर में संयुक्त विरोध प्रदर्शन आयोजित करेंगे।
CPI (ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने IANS से बातचीत में कहा कि बिहार में SIR प्रक्रिया की शुरुआत से ही वाम दल जिन मुद्दों को उठा रहे थे, वे अब चुनाव आयोग की प्रक्रिया के ज़रिए सामने आ गए हैं। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर पूरे देश में नाराज़गी है। भट्टाचार्य के अनुसार, उनकी प्रमुख मांगों में ज्ञानेश कुमार को तत्काल उनके पद से हटाना और SIR प्रक्रिया को तुरंत रोकना शामिल है।
संविधान के ख़िलाफ़ गंभीर अपराध का आरोप
CPI (M) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने भी ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की वकालत की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुमार ने संविधान के विरुद्ध एक गंभीर अपराध किया है और चुनावी व्यवस्था को बाधित करने का प्रयास किया, जिससे कई लोगों के मतदान का अधिकार प्रभावित हुआ है। मोल्लाह ने कहा, "ज्ञानेश कुमार को सिर्फ़ इस्तीफ़ा नहीं देना चाहिए, बल्कि उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए।" उन्होंने इस मामले में अदालत से भी शीघ्र संज्ञान लेने की मांग की।
हन्नान मोल्लाह ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दिपके के प्रस्तावित विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रदर्शन करना एक अच्छी बात है और कई लोग इसके लिए आगे आए हैं। उन्होंने भविष्य में ऐसे संवैधानिक पदों पर किसी भी 'भ्रष्ट व्यक्ति' की नियुक्ति को रोकने के लिए एक मज़बूत व्यवस्था बनाने पर भी ज़ोर दिया।
बिहार की कानून-व्यवस्था पर भी साधा निशाना
इस दौरान, हन्नान मोल्लाह ने बिहार में महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ते अपराधों को लेकर राज्य सरकार की आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि राज्य में लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं, लेकिन सरकार उन्हें रोकने में विफल रही है। उनके मुताबिक, बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति ख़राब है और सरकार को इसकी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार के बड़े-बड़े वादों के बावजूद अपराध पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है।
इनपुट: IANS



