पाकिस्तान में प्रदर्शनों से पहले सरकार की सख्ती, इस्लामाबाद और रावलपिंडी किले में तब्दील
पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी के प्रस्तावित विरोध मार्च से पहले, शहबाज शरीफ सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राजधानी इस्लामाबाद और रावलपिंडी को देश के…
पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी के प्रस्तावित विरोध मार्च से पहले, शहबाज शरीफ सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राजधानी इस्लामाबाद और रावलपिंडी को देश के बाकी हिस्सों से लगभग काट दिया गया है और किसी भी तरह के जमावड़े पर रोक लगा दी गई है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब देश की जनता पहले से ही पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और कमरतोड़ महंगाई से बेहाल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ शहरों को सील करने से सरकार की मुश्किलें कम नहीं होंगी, क्योंकि आर्थिक और राजनीतिक कुप्रबंधन ने सरकार की स्थिति को कमजोर कर दिया है। 'द फ्राइडे टाइम्स' की एक रिपोर्ट में कराची विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मोनिस अहमर ने लिखा है कि सरकार जनता के गुस्से को दबाने के लिए अत्यधिक बल का प्रयोग कर रही है। उन्होंने बताया कि इमरान खान की रिहाई और महंगाई के खिलाफ पीटीआई के विरोध को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की जा रही हैं और दोनों शहरों में सैकड़ों कंटेनर तैनात किए गए हैं।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर चिंता
रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे जाने के बावजूद, पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं घटाए हैं। प्रोफेसर अहमर के अनुसार, पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जो रोजाना तेल की कीमतों की समीक्षा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी अपनी आलीशान जीवनशैली और कर्जों का ब्याज चुकाने के लिए जनता से पैसा वसूलने में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं। पेट्रोल के अलावा, बिजली, गैस, सब्जियों और आटे जैसी जरूरी चीजों के दाम भी आसमान छू रहे हैं।
विरोध को रोकने के लिए प्रतिबंध
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने 27 सितंबर को विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। इसके जवाब में, स्थानीय अधिकारियों ने इस्लामाबाद में दो महीने के लिए सभी प्रकार की सभाओं और जुलूसों पर प्रतिबंध लगा दिया है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, रेड जोन समेत किसी भी सार्वजनिक स्थान पर पांच या इससे अधिक लोगों के जमा होने पर पाबंदी है। इसी तरह, पंजाब सरकार ने भी पूरे प्रांत में 13 दिनों के लिए सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगा दी है और चार जिलों में रेंजर्स को तैनात किया है।
गंभीर संकट की चेतावनी
प्रोफेसर मोनिस अहमर ने अपनी टिप्पणी में चेतावनी दी है कि राजधानी को सील करने से न सिर्फ आर्थिक लागत बढ़ेगी, बल्कि देश की छवि भी खराब होगी। उनका मानना है कि सरकार की इन कार्रवाइयों से आर्थिक चुनौतियों के कारण पनप रहे असंतोष को और बल मिल रहा है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और मीडिया को नियंत्रित कर लिया गया है, लेकिन यह स्थिति तभी तक बनी रह सकती है जब तक कि नागरिक समाज और युवा इसके खिलाफ एक बड़ा आंदोलन शुरू करने का फैसला नहीं कर लेते।
इनपुट: IANS



