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महाराष्ट्र: विदेश से MBBS करने वालों के लिए बनाते थे फर्जी सर्टिफिकेट, मास्टरमाइंड समेत 3 गिरफ्तार

महाराष्ट्र में विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करके लौटे छात्रों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे डॉक्टर बनाने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक…

महाराष्ट्र: विदेश से MBBS करने वालों के लिए बनाते थे फर्जी सर्टिफिकेट, मास्टरमाइंड समेत 3 गिरफ्तार
(फोटो: IANS)

महाराष्ट्र में विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करके लौटे छात्रों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे डॉक्टर बनाने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र साइबर विभाग ने इस मामले में मास्टरमाइंड समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह उन छात्रों के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) के नकली स्कोरकार्ड और सर्टिफिकेट बनाता था, जो भारत में प्रैक्टिस करने के लिए अनिवार्य इस परीक्षा को पास नहीं कर पाते थे।

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इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) ने रजिस्ट्रेशन के लिए आए आवेदनों की पड़ताल की। काउंसिल को शक हुआ कि कुछ विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स के पास अनिवार्य स्क्रीनिंग टेस्ट पास किए बिना ही मेडिकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट हैं। इसके बाद MMC ने मुंबई स्थित नोडल साइबर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई, जिसके आधार पर जांच शुरू हुई।

जांच और गिरफ्तारियां

महाराष्ट्र साइबर विभाग ने टेक्निकल एनालिसिस, डिजिटल रिकॉर्ड और सिस्टम लॉग्स की गहन जांच के बाद इस धोखाधड़ी में शामिल लोगों की पहचान की। अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से एक, नासिक निवासी राहुल गोपाल पाटील (35) को इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड और मुख्य संचालक बताया जा रहा है। जांच में पता चला है कि उसने पैसों के बदले करीब 15 से 20 आवेदकों के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे।

गिरफ्तार किए गए अन्य दो आरोपियों की पहचान बुलढाणा निवासी वरुण प्रतापराव आखाडे (28) और संकेत प्रभाकर उनहाले (26) के रूप में हुई है। दिलचस्प बात यह है कि ये दोनों खुद भी FMGE परीक्षा में फेल हो चुके थे और फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए डॉक्टर के तौर पर प्रैक्टिस करने की फिराक में थे।

नेटवर्क की पड़ताल जारी

साइबर विभाग के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ चल रही है ताकि फर्जी दस्तावेज बनाने, भेजने और इस्तेमाल करने वाले पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की पहचान के लिए वित्तीय लेन-देन, डिजिटल डिवाइस और कम्युनिकेशन रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों ने विदेश से पढ़े सभी मेडिकल ग्रेजुएट्स को चेतावनी दी है कि वे दलालों से दूर रहें और शॉर्टकट अपनाने की कोशिश न करें, अन्यथा उन्हें कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

इनपुट: IANS

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News4Social महाराष्ट्र डेस्क

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