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फल-सब्जियों में कीटनाशक: सरकारी जांच में 97% सैंपल सुरक्षित, सिर्फ 3% में तय सीमा से ज्यादा अंश

भारत में बिकने वाले ज्यादातर फल और सब्जियां कीटनाशकों के अवशेषों के मामले में सुरक्षित हैं। सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन सालों में जांचे गए 70,000 से ज्यादा सैंपल…

फल-सब्जियों में कीटनाशक: सरकारी जांच में 97% सैंपल सुरक्षित, सिर्फ 3% में तय सीमा से ज्यादा अंश
(फोटो: IANS)

भारत में बिकने वाले ज्यादातर फल और सब्जियां कीटनाशकों के अवशेषों के मामले में सुरक्षित हैं। सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन सालों में जांचे गए 70,000 से ज्यादा सैंपल में से लगभग 97 प्रतिशत में कीटनाशकों की मात्रा भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा निर्धारित सीमा के अंदर पाई गई।

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समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को संसद को बताया कि 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कुल 70,652 सैंपल इकट्ठे किए गए थे। इनमें से केवल 3.1 प्रतिशत सैंपल ही ऐसे थे, जिनमें कीटनाशक के अंश FSSAI की 'अधिकतम अवशेष सीमा' (MRL) से अधिक थे।

किसानों को जागरूक करने की पहल

मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जानकारी दी कि सरकार 2005-06 से ही 'राष्ट्रीय स्तर पर कीटनाशक अवशेषों की निगरानी' (MPRNL) नामक एक प्रोजेक्ट चला रही है। इस कार्यक्रम के तहत 40 प्रयोगशालाओं में सैंपल की जांच की जाती है। इन जांचों की रिपोर्ट संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझा की जाती है, ताकि वे किसानों को कीटनाशकों के सुरक्षित और सही इस्तेमाल के बारे में प्रशिक्षित कर सकें।

इसके अलावा, सरकार ने एक डिजिटल प्लेटफॉर्म 'नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम' (NPSS) भी लॉन्च किया है। यह एक मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल है, जो किसानों को कीटों की पहचान, निगरानी और विशेषज्ञों से सलाह लेने में रियल-टाइम मदद करता है। यह सिस्टम केवल तभी और उतनी ही मात्रा में कीटनाशक के उपयोग की सलाह देता है, जितनी आवश्यक हो और जो सरकार द्वारा स्वीकृत हो।

प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान

कृषि मंत्रालय अपने 48 'केंद्रीय एकीकृत कीट प्रबंधन केंद्रों' (CIPMC) के माध्यम से किसानों के लिए लगातार जागरूकता और क्षमता-निर्माण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।

आंकड़ों के मुताबिक, 2021-22 और 2025-26 के बीच, इन केंद्रों ने कई कार्यक्रम चलाए:

  • किसान फील्ड स्कूल: 1,353 कार्यक्रम आयोजित हुए, जिससे 46,969 किसानों को लाभ मिला।
  • मानव संसाधन विकास कार्यक्रम: 680 दो-दिवसीय कार्यक्रमों से 37,664 किसान प्रशिक्षित हुए।
  • जागरूकता अभियान: कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग पर 2,384 अभियानों से 76,702 किसान जुड़े।
  • बीज उपचार अभियान: 2,548 अभियानों के जरिए 81,048 किसानों तक पहुंच बनाई गई।

चौहान ने यह भी बताया कि 21 राज्यों ने कीटनाशक अवशेषों की निगरानी और अच्छी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए विशेष समितियां भी बनाई हैं, ताकि कृषि उत्पादों को और सुरक्षित बनाया जा सके।

इनपुट: IANS

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