सरकारी खजाने में कर संग्रह की रफ्तार तेज़, शुद्ध प्रत्यक्ष कर वसूली 23% बढ़ी
चालू वित्त वर्ष में भारत के सरकारी खजाने में प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) संग्रह में शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 1 अप्रैल से 10 अगस्त तक की अवधि के लिए जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, शुद्ध प्रत्यक्ष…
चालू वित्त वर्ष में भारत के सरकारी खजाने में प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) संग्रह में शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 1 अप्रैल से 10 अगस्त तक की अवधि के लिए जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 23% बढ़कर 8.11 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के मुताबिक, यह अर्थव्यवस्था में मजबूत राजस्व वसूली का संकेत है।
प्रत्यक्ष करों में मुख्य रूप से कॉरपोरेट टैक्स (कंपनियों पर लगने वाला कर) और व्यक्तिगत आयकर (व्यक्तियों की आय पर लगने वाला कर) शामिल होते हैं। इन आंकड़ों में कंपनियों के अलावा व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF), फर्मों और अन्य संस्थाओं द्वारा चुकाया गया टैक्स भी शामिल है।
कुल और शुद्ध संग्रह का ब्योरा
आंकड़ों के मुताबिक, रिफंड जारी करने से पहले कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह 19.75% की बढ़ोतरी के साथ 9.55 लाख करोड़ रुपये रहा। पिछले साल इसी दौरान यह 7.97 लाख करोड़ रुपये था। सरकार ने इस अवधि में 1.43 लाख करोड़ रुपये के रिफंड भी जारी किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.79% अधिक है। कुल संग्रह से रिफंड घटाने के बाद शुद्ध कर संग्रह (Net Tax Collection) का आंकड़ा प्राप्त होता है।
विभिन्न करों का प्रदर्शन:
- शुद्ध कॉरपोरेट टैक्स: यह 2.26 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2.70 लाख करोड़ रुपये हो गया।
- शुद्ध नॉन-कॉरपोरेट टैक्स: यह 4.11 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 5.07 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
- सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT): शेयरों की खरीद-बिक्री पर लगने वाले इस टैक्स का शुद्ध संग्रह भी 22,354.31 करोड़ रुपये से बढ़कर 33,823.74 करोड़ रुपये हो गया।
राजकोषीय घाटे की स्थिति
यह मजबूत कर संग्रह ऐसे समय में हुआ है जब सरकार का खर्च भी बढ़ा है। 31 जुलाई को कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में देश का राजकोषीय घाटा 3.1 लाख करोड़ रुपये था। यह पूरे साल के बजट अनुमान का 18.2 प्रतिशत है। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 2.8 लाख करोड़ रुपये था, जो सरकारी खर्च में वृद्धि को दर्शाता है।
इनपुट: IANS



