मंगलवार, 11 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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भारतीय नौसेना को और आधुनिक युद्धपोतों की ज़रूरत, समुद्री रास्ते सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती: वाइस एडमिरल संजय साधु

भारतीय नौसेना को देश के समुद्री मार्गों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को बिना बाधा के जारी रखने के लिए और अधिक उन्नत युद्धपोतों की आवश्यकता होगी। वॉरशिप प्रोडक्शन एंड एक्विजिशन के कंट्रोलर, वाइस एडमिरल…

भारतीय नौसेना को और आधुनिक युद्धपोतों की ज़रूरत, समुद्री रास्ते सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती: वाइस एडमिरल संजय साधु
(फोटो: IANS)

भारतीय नौसेना को देश के समुद्री मार्गों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को बिना बाधा के जारी रखने के लिए और अधिक उन्नत युद्धपोतों की आवश्यकता होगी। वॉरशिप प्रोडक्शन एंड एक्विजिशन के कंट्रोलर, वाइस एडमिरल संजय साधु ने मंगलवार को कोलकाता में यह बात कही। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, वह गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) लिमिटेड में नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (एनजीओपीवी) 'श्रुति' के लॉन्च समारोह में बोल रहे थे।

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उन्होंने कहा कि मध्य-पूर्व में अमेरिका-ईरान तनाव जैसी क्षेत्रीय परिस्थितियों का होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर असर पड़ा है। वाइस एडमिरल साधु ने बताया, "इन हालात को देखते हुए नौसेना हमारे समुद्री रास्तों की सुरक्षा करने और भारत की ऊर्जा जरूरतों व अन्य जरूरी सामान की सप्लाई सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रही है।"

आत्मनिर्भर भारत और शिपबिल्डिंग का लक्ष्य

वाइस एडमिरल साधु ने सरकार की 'आत्मनिर्भरता' पहल पर जोर देते हुए बताया कि नौसेना ने 44 प्लेटफॉर्म्स का ऑर्डर दिया है और ये सभी भारतीय शिपयार्ड में ही बनाए जा रहे हैं। उन्होंने 'श्रुति' का उदाहरण देते हुए कहा, "जब यह एनजीओपीवी बनकर तैयार हो जाएगा तो इसमें 85 प्रतिशत हिस्सा भारत में बना होगा।" उन्होंने शिपबिल्डिंग उद्योग से नौसेना के लिए बेहतरीन गुणवत्ता वाले प्लेटफॉर्म बनाने की अपील की।

उन्होंने सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "सरकार भारत को ग्लोबल शिपबिल्डिंग हब बनाने की योजना बना रही है।" इसके लिए सरकार ने 70,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। लक्ष्य है कि 2035 तक दुनिया भर में बनने वाले जहाजों का 5% हिस्सा भारतीय शिपयार्ड बनाएं और भारत के कमर्शियल जहाजों के बेड़े का कम से कम 50% देश में ही निर्मित हो। वाइस एडमिरल ने याद दिलाया कि 2047 तक भारत को शिपबिल्डिंग देशों की सूची में 5वें स्थान पर लाने का लक्ष्य है, जिसे कड़ी मेहनत से हासिल किया जा सकता है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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