शिवसेना (UBT) का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला, CEC पर लगाया 'माफिया' की तरह काम करने का आरोप
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने मुखपत्र 'सामना' के एक संपादकीय में भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC)…
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने मुखपत्र 'सामना' के एक संपादकीय में भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के मनमाने रवैये के खिलाफ आयोग के भीतर ही मतभेद उभर आए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, शिवसेना (UBT) ने दावा किया है कि पिछले दस महीनों में दो चुनाव आयुक्तों ने CEC के काम करने के तरीके पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई है।
संपादकीय में मीडिया की खोजी रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर संधू और विवेक जोशी ने CEC ज्ञानेश कुमार के 'माफिया-जैसे' कामकाज का विरोध किया। शिवसेना (UBT) का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने इन आपत्तियों को लगातार नजरअंदाज किया और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से मतदाताओं के नाम जोड़ने या हटाने जैसे एकतरफा फैसले लिए।
मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप
शिवसेना (UBT) ने 'विशेष सारांश संशोधन' (SSR) प्रक्रिया को एक 'व्यवस्थागत घोटाला' करार दिया है। पार्टी ने दावा किया कि इस प्रक्रिया की आड़ में पूरे भारत में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित कर दिया गया, जिनमें कई प्रतिष्ठित नागरिक भी शामिल हैं। संपादकीय के अनुसार, अकेले महाराष्ट्र की मतदाता सूची से दो करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए।
पार्टी ने यह भी कहा कि हाल के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान वोटों की संख्या में अचानक 42 लाख की वृद्धि देखी गई, जिसने कथित तौर पर भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत सुनिश्चित की। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल और बिहार के विधानसभा चुनावों में भी इसी तरह लाखों मतदाताओं के नाम जानबूझकर हटाने का आरोप लगाया गया है।
गृह मंत्री और CEC पर सीधा निशाना
संपादकीय में इस पूरी कथित 'संवैधानिक गिरावट' के पीछे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मुख्य 'मास्टरमाइंड' बताया गया है। वहीं, पूर्व CEC राजीव कुमार और वर्तमान CEC ज्ञानेश कुमार को 'संवैधानिक माफिया' और 'लोकतंत्र का हत्यारा' कहा गया है। पार्टी ने ECI नेतृत्व पर पार्टियों में फूट डालने और असली नाम-चिह्न अलग हुए गुटों को सौंपकर लोकतंत्र को कमजोर करने का भी आरोप लगाया।
संपादकीय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा गया है, "जब तक अमित शाह और ज्ञानेश कुमार जैसे लोग सत्ता में हैं, भारत के संविधान का कोई मतलब नहीं है। प्रधानमंत्री को उन्हें तुरंत हटा देना चाहिए – तभी देश को बचाया जा सकता है।" पार्टी ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं पर से जनता का भरोसा पूरी तरह उठ गया है।
इनपुट: IANS



