बीमा कमीशन की नई सीमा का प्रस्ताव आते ही पॉलिसीबाजार और HDFC Life जैसे शेयरों में भारी गिरावट
गुरुवार को बीमा कंपनियों और पॉलिसी एग्रीगेटर्स के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसकी मुख्य वजह बीमा नियामक IRDAI का एक नया प्रस्ताव है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस प्रस्ताव में जीवन बीमा…
गुरुवार को बीमा कंपनियों और पॉलिसी एग्रीगेटर्स के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसकी मुख्य वजह बीमा नियामक IRDAI का एक नया प्रस्ताव है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस प्रस्ताव में जीवन बीमा पॉलिसियों पर एजेंटों और डिस्ट्रिब्यूटर्स को मिलने वाले कमीशन की एक नई अधिकतम सीमा तय करने की बात कही गई है। इस खबर के आते ही पीबी फिनटेक (पॉलिसी बाजार) के शेयर में 28% तक की बड़ी गिरावट देखी गई।
बाजार पर इस प्रस्ताव का असर काफी गहरा रहा। दोपहर 12 बजे तक टर्टलमिंट फिनटेक के शेयर 20% तक टूट गए। वहीं, एचडीएफसी लाइफ के शेयर में 5% और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के शेयर में 2.5% की गिरावट दर्ज की गई। नियामक के इस कदम का उद्देश्य पॉलिसी बेचने पर मिलने वाले शुरुआती भारी-भरकम इंसेंटिव को कम करना है, ताकि पॉलिसीधारक अपनी पॉलिसी को लंबे समय तक जारी रखें।
क्या है कमीशन का नया प्रस्तावित ढाँचा?
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि कमीशन की संरचना ऐसी होनी चाहिए जो एजेंटों को सिर्फ पहले साल के प्रीमियम पर नहीं, बल्कि पॉलिसी को कई वर्षों तक जारी रखवाने के लिए प्रोत्साहित करे। इसके लिए प्रीमियम भुगतान की अवधि (PPT) के आधार पर अलग-अलग सीमाएं तय की गई हैं।
प्रस्तावित कमीशन दरें इस प्रकार हैं:
- 5 साल से कम PPT: डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों के लिए 5% और एजेंटों के लिए 6.25%।
- 5 साल PPT: यह सीमा क्रमशः 10% और 12.5% होगी।
- 6 से 8 साल PPT: सीमाएँ बढ़कर 14% और 17.5% हो जाएँगी।
- 9 साल PPT: यह 18% और 22.5% होगी।
- 10 साल या अधिक PPT: कमीशन की अधिकतम सीमा 20% (डिस्ट्रिब्यूटर) और 25% (एजेंट) होगी।
सिंगल प्रीमियम और अन्य पॉलिसियों पर भी असर
प्रस्ताव में सिंगल प्रीमियम और टैक्स छूट वाली पॉलिसियों के लिए भी कमीशन की दरें कम रखने की बात कही गई है। उदाहरण के लिए, सिंगल प्रीमियम वाली व्यक्तिगत बचत पॉलिसी पर पहले साल का कमीशन डिस्ट्रिब्यूटर्स के लिए 1% और एजेंटों के लिए 2% तक सीमित होगा। वहीं, सिंगल प्रीमियम वाली प्योर टर्म पॉलिसी के लिए यह सीमा क्रमशः 7.5% और 10% होगी।
नियामक ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित कमीशन में इंसेंटिव, अवॉर्ड, बिक्री खर्च की भरपाई और गैर-नकदी लाभ जैसी सभी चीजें शामिल होंगी। इस प्रस्ताव के तहत, मल्टी-ईयर प्रीमियम वाली टर्म पॉलिसी पर पहले साल का कमीशन डिस्ट्रिब्यूशन संस्थाओं के लिए 25% और एजेंटों के लिए 30% तक हो सकता है।
इनपुट: IANS



