मंगलवार, 11 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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असम: अब ड्रोन से पहुँचेगी डाक, 40 रूटों पर इंडिया पोस्ट ने शुरू की हाई-टेक डिलीवरी सेवा

देश के दूरदराज और दुर्गम इलाकों में डाक पहुँचाने की चुनौती से निपटने के लिए इंडिया पोस्ट ने अब तकनीक का सहारा लिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, असम में शाखा डाकघरों के बीच डाक बैगों के परिवहन के…

असम: अब ड्रोन से पहुँचेगी डाक, 40 रूटों पर इंडिया पोस्ट ने शुरू की हाई-टेक डिलीवरी सेवा
(फोटो: IANS)

देश के दूरदराज और दुर्गम इलाकों में डाक पहुँचाने की चुनौती से निपटने के लिए इंडिया पोस्ट ने अब तकनीक का सहारा लिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, असम में शाखा डाकघरों के बीच डाक बैगों के परिवहन के लिए ड्रोन सेवा की शुरुआत कर दी गई है। केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम सिंधिया ने इस पहल की जानकारी दी।

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यह सेवा विशेष रूप से उन क्षेत्रों में डाक वितरण को तेज, भरोसेमंद और ट्रैक करने योग्य बनाएगी, जहाँ पारंपरिक परिवहन साधनों से पहुँचना मुश्किल और समय लेने वाला होता है। सिंधिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तकनीक-आधारित जनसेवा के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य देश के हर कोने तक डाक सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करना है।

स्काई एयर मोबिलिटी के सहयोग से विस्तार

इंडिया पोस्ट ने यह ड्रोन सेवा 'स्काई एयर मोबिलिटी' के साथ मिलकर शुरू की है। शुरुआती चरण में असम के 40 रूटों पर ड्रोन आधारित डाक सेवाएँ संचालित की जाएँगी। यह नेटवर्क असम और हिमाचल प्रदेश में कुल 150 चिन्हित रूटों को कवर करने की एक बड़ी योजना का हिस्सा है। अगले दो से तीन महीनों में इन सभी 150 रूटों पर ड्रोन सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

हिमाचल प्रदेश से मिली प्रेरणा

असम से पहले इसी तरह की एक सफल पहल 12 जून को हिमाचल प्रदेश में शुरू की गई थी। वहाँ मंडी प्रधान डाकघर और रिहरधार शाखा डाकघर के बीच ड्रोन से डाक और पार्सल भेजे गए थे। इस रूट पर पारंपरिक तरीके से डाक पहुँचाने में जहाँ दो घंटे से ज़्यादा लगते थे, वहीं ड्रोन ने यह दूरी महज़ सात मिनट में तय कर ली। डाक विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह योजना ग्रामीण डाक सेवकों और कर्मचारियों के सुझावों पर आधारित है, जिन्होंने दुर्गम क्षेत्रों में बेहतर संपर्क की आवश्यकता पर जोर दिया था। ड्रोन सेवा न केवल समय बचाती है, बल्कि रियल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा भी देती है और यह परिवहन का एक पर्यावरण-अनुकूल माध्यम भी है।

इनपुट: IANS

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