मंगलवार, 11 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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कर्नाटक: ₹2110 करोड़ की पोंजी स्कीम का भंडाफोड़? ED ने शिवम एसोसिएट्स के कई ठिकानों पर की छापेमारी

कर्नाटक के बेलगावी में एक कथित पोंजी स्कीम के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने शिवम एसोसिएट्स और उससे जुड़े लोगों के कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है, जिसमें भारी…

कर्नाटक: ₹2110 करोड़ की पोंजी स्कीम का भंडाफोड़? ED ने शिवम एसोसिएट्स के कई ठिकानों पर की छापेमारी
(फोटो: IANS)

कर्नाटक के बेलगावी में एक कथित पोंजी स्कीम के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने शिवम एसोसिएट्स और उससे जुड़े लोगों के कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है, जिसमें भारी मात्रा में वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, निवेशकों को हर महीने 3% के निश्चित रिटर्न का लालच देकर लगभग 2110.97 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जमा कराई गई थी।

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ईडी की यह कार्रवाई 7 अगस्त को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत बेलगावी, चिक्कोडी और निपाणी में की गई। एजेंसी ने यह जांच मालामारुति पुलिस स्टेशन, बेलगावी शहर में दर्ज एक एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर 'अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध अधिनियम, 2019' और 'वित्तीय प्रतिष्ठानों में जमाकर्ताओं के हितों का कर्नाटक संरक्षण अधिनियम, 2004' के तहत दर्ज हुई थी, जिसमें लोगों को ऊंचे रिटर्न का झांसा देकर निवेश कराने का आरोप है।

जांच में क्या सामने आया?

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि शिवम एसोसिएट्स और उसके सहयोगियों ने बड़ी संख्या में निवेशकों से फंड इकट्ठा किया। ईडी के मुताबिक, इस फंड का लेन-देन व्यापारिक, व्यक्तिगत और मध्यस्थ खातों के जरिए किया गया। रकम को स्टॉक ब्रोकर्स, फिक्स्ड-डिपॉजिट खातों और अन्य लाभार्थियों को भी ट्रांसफर किया गया। जांच में मुख्य आरोपी शिवानंद सिद्दप्पा नीलनवर के अलावा सुभाष रामागोडा नंदरगी, महेश एस नीलनवर और शिवम प्रोडक्शंस समेत कई अन्य संस्थाओं के बीच वित्तीय गठजोड़ की भी पहचान हुई है।

हज़ारों करोड़ का हिसाब नहीं

तलाशी अभियान के दौरान यह पाया गया कि जमा किए गए 2110.97 करोड़ रुपये में से निवेशकों को लगभग 333.89 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया गया। इस तरह, अपराध से अर्जित आय में से 1,777.08 करोड़ रुपये का अभी तक कोई हिसाब नहीं मिल पाया है। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि लोगों को निवेश के लिए लुभाने वाले एजेंटों को 0.5 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था।

ईडी ने तलाशी के दौरान अपराध से हुई कमाई के लेन-देन, लेयरिंग और उसे खपाने से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और डिजिटल सबूत ज़ब्त किए हैं। एजेंसी ने अचल संपत्तियों में निवेश और फंड के हेरफेर से संबंधित रिकॉर्ड भी बरामद किए हैं। फिलहाल, ज़ब्त किए गए सबूतों की जांच की जा रही है और मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।

इनपुट: IANS

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News4Social क्राइम डेस्क

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