रांची: पुलिस लाठीचार्ज के बाद छात्रों का मौन जुलूस, शिबू सोरेन के कटआउट के साथ जताया विरोध
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ छात्रों का आंदोलन मंगलवार को एक नए रूप में सामने आया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान हुए पुलिस लाठीचार्ज के विरोध…
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ छात्रों का आंदोलन मंगलवार को एक नए रूप में सामने आया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान हुए पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में बड़ी संख्या में छात्रों ने रांची में एक मौन जुलूस निकाला। इस दौरान कई छात्रों ने मुंह पर पट्टी बांध रखी थी, जबकि कुछ ने होठों पर उंगली रखकर अपना शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया।
यह विरोध मार्च जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू होकर करीब दो किलोमीटर दूर अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंचा। प्रदर्शनकारी छात्र अपने साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख शिबू सोरेन के कटआउट और अपनी मांगों से जुड़ी तख्तियां लिए हुए थे। कई छात्रों ने अपने मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट जलाकर भी प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया।
क्या हैं आंदोलन की मुख्य मांगें?
छात्रों का यह आंदोलन 5 जुलाई से चल रहा है, जिसका मुख्य केंद्र JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) और JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) की भर्ती परीक्षाओं में हुईं कथित अनियमितताएं हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि विवादित परीक्षाओं को रद्द किया जाए, इन गड़बड़ियों की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच हो और पूरी भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार किए जाएं।
विधानसभा घेराव और पुलिस कार्रवाई
इससे पहले सोमवार को छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा का घेराव करने की कोशिश की थी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कई बैरिकेडिंग को पार कर लिया था, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया और बाद में लाठीचार्ज भी किया, जिसमें कई छात्रों के घायल होने की खबर है।
इसी आंदोलन के एक प्रमुख चेहरे, देवेंद्र नाथ महतो, पिछले 10 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। सोमवार को घेराव के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्होंने अस्पताल से भी अपनी भूख हड़ताल जारी रखने की घोषणा की है। छात्रों का कहना है कि वे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीकों से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
इनपुट: IANS



