मंगलवार, 11 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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F&O ट्रेडिंग: सेबी के नए नियमों से घटा निवेशकों का कुल घाटा, लेकिन प्रति व्यक्ति नुकसान बढ़ा

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में रिटेल निवेशकों के कुल नुकसान में 18% की कमी आई है। हालांकि, इसी अवधि में हर निवेशक का औसत नुकसान थोड़ा बढ़ गया है। मंगलवार को सरकार…

F&O ट्रेडिंग: सेबी के नए नियमों से घटा निवेशकों का कुल घाटा, लेकिन प्रति व्यक्ति नुकसान बढ़ा
(फोटो: IANS)

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में रिटेल निवेशकों के कुल नुकसान में 18% की कमी आई है। हालांकि, इसी अवधि में हर निवेशक का औसत नुकसान थोड़ा बढ़ गया है। मंगलवार को सरकार ने संसद में यह जानकारी दी। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार नियामक सेबी (SEBI) द्वारा उठाए गए कदमों के बाद ये बदलाव देखने को मिले हैं।

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राज्यसभा में एक लिखित जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि सेबी के रेगुलेटरी बदलावों के बाद F&O सेगमेंट में ट्रेडिंग करने वाले रिटेल निवेशकों की संख्या में भी कमी आई है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में निवेशकों को कुल 1,11,788 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 91,685 करोड़ रुपए रह गया।

ट्रेडिंग घटी, पर औसत घाटा बढ़ा

आंकड़ों के अनुसार, F&O में ट्रेडिंग करने वाले यूनिक रिटेल निवेशकों की संख्या वित्त वर्ष 25 के 98.1 लाख से करीब 20% घटकर वित्त वर्ष 26 में 78.6 लाख हो गई। हालांकि, कुल घाटा कम होने के बावजूद, प्रति निवेशक औसत नुकसान 1,13,913 रुपए से बढ़कर 1,16,654 रुपए हो गया। इसी दौरान, इक्विटी डेरिवेटिव्स का कुल टर्नओवर भी 213 लाख करोड़ रुपए से घटकर 202 लाख करोड़ रुपए रह गया।

दिलचस्प बात यह है कि इस अवधि में एफएंडओ ट्रेड पर लगने वाले सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) से सरकार की कमाई काफी बढ़ गई। यह एक साल पहले के 7,893 करोड़ रुपए से बढ़कर 27,695 करोड़ रुपए हो गई।

सेबी ने क्या कदम उठाए थे?

मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि नवंबर 2024 से लागू हुए सेबी के उपायों का मकसद रिटेल निवेशकों के जोखिम को कम करना था। इन कदमों में साप्ताहिक और मासिक इंडेक्स डेरिवेटिव्स को तर्कसंगत बनाना, कॉन्ट्रैक्ट साइज बढ़ाना, एक्सपायरी के दिनों में बेहतर रिस्क कवरेज और ऑप्शन प्रीमियम की एडवांस वसूली जैसे नियम शामिल थे। इसके अलावा, मई 2025 में एक्सचेंजों पर एक्सपायरी के दिनों को व्यवस्थित करने और जोखिम की निगरानी को और मजबूत करने के लिए अतिरिक्त उपाय भी किए गए।

इनपुट: IANS

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