भारत दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर, मांग से ज़्यादा पैदावार, डेयरी किसानों को KCC से मिल रहा बड़ा सहारा
भारत के डेयरी सेक्टर ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जहाँ देश में दूध का कुल उत्पादन घरेलू मांग को पार कर गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024-25 में भारत ने 247.87…
भारत के डेयरी सेक्टर ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जहाँ देश में दूध का कुल उत्पादन घरेलू मांग को पार कर गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024-25 में भारत ने 247.87 मिलियन टन दूध का उत्पादन किया, जबकि देश की अनुमानित मांग 243 मिलियन टन थी। यह आँकड़ा न केवल डेयरी क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि देश अब अपनी ज़रूरत से ज़्यादा दूध पैदा कर रहा है।
इस सफलता के पीछे एक बड़ी वजह डेयरी किसानों की संस्थागत ऋण तक बढ़ती पहुँच है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना का लाभ उठाने वाले पशुपालक किसानों की संख्या पिछले पाँच सालों में तीन गुना से भी ज़्यादा हो गई है। जहाँ 2021-22 में 15.08 लाख किसान इस योजना से जुड़े थे, वहीं 2025-26 तक यह संख्या बढ़कर 50.42 लाख तक पहुँच गई है।
डेयरी उत्पादों का बढ़ता निर्यात
घरेलू बाज़ार में मजबूती के साथ-साथ भारतीय डेयरी उत्पादों की माँग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रही है। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से डेयरी उत्पादों का कुल निर्यात 407.18 मिलियन डॉलर तक पहुँच गया। यह आँकड़ा वैश्विक बाज़ार में भारतीय डेयरी सेक्टर की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का प्रतीक है।
पशुधन सुधार और रोग नियंत्रण पर ज़ोर
सरकार दूध उत्पादन और पशुओं की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए कई योजनाएँ चला रही है। मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि दिसंबर 2014 से चल रहे 'राष्ट्रीय गोकुल मिशन' का विस्तार किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य देशी नस्लों का संरक्षण और आनुवंशिक सुधार करना है।
इसके अलावा, 2014-15 से लागू 'राष्ट्रीय पशुधन मिशन' (NLM) के ज़रिए वैज्ञानिक प्रजनन, बेहतर चारे की उपलब्धता, रोज़गार सृजन और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस मिशन के तहत मांस, बकरी के दूध, अंडे और ऊन जैसे उत्पादों को असंगठित क्षेत्र से संगठित बाज़ार तक पहुँचाने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।
पशुओं को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए केंद्र सरकार 'पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम' (LHDCPI) के तहत राज्यों को 100% वित्तीय सहायता दे रही है। इस कार्यक्रम में खुरपका-मुंहपका (FMD), ब्रुसेलोसिस और क्लासिकल स्वाइन फीवर (CSF) जैसी बीमारियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है।
इनपुट: IANS



