ओडिशा की वैज्ञानिक क्षमता को एक करेगी नई योजना, समुद्री संसाधन और अंतरिक्ष तकनीक पर होगा ज़ोर
केंद्र सरकार ने एक महत्वाकांक्षी एकीकृत रोडमैप पेश किया है, जिसका उद्देश्य ओडिशा के समृद्ध समुद्री और तटीय संसाधनों, बायोटेक्नोलॉजी इकोसिस्टम, और अंतरिक्ष क्षमताओं को एक साथ लाना है। समाचार एजेंसी…
केंद्र सरकार ने एक महत्वाकांक्षी एकीकृत रोडमैप पेश किया है, जिसका उद्देश्य ओडिशा के समृद्ध समुद्री और तटीय संसाधनों, बायोटेक्नोलॉजी इकोसिस्टम, और अंतरिक्ष क्षमताओं को एक साथ लाना है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को इस योजना का अनावरण किया, जो देश के 'रेयर अर्थ कॉरिडोर' प्रस्ताव को भी इन क्षेत्रों से जोड़ेगी।
इस रोडमैप पर चर्चा के लिए डॉ. सिंह ने ओडिशा के विज्ञान और प्रौद्योगिकी कैबिनेट मंत्री कृष्ण चंद्र पात्रा से मुलाकात की। इस बैठक का लक्ष्य अलग-अलग संस्थानों की कोशिशों को एक साथ लाकर एक ऐसा जुड़ा हुआ इकोसिस्टम बनाना है, जिसमें समुद्री संसाधन, महत्वपूर्ण खनिज, जीव विज्ञान, और अंतरिक्ष तकनीक मिलकर राज्य के आर्थिक विकास को गति दें।
संस्थानों का विस्तार और सहयोग
इस योजना के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में, भुवनेश्वर स्थित 'इंस्टिट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज' (ILS) के विस्तार को अंतिम रूप दे दिया गया है। एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि ओडिशा सरकार इसके लिए अतिरिक्त 50 एकड़ ज़मीन देगी। संस्थान की बढ़ी हुई क्षमता लाइफ साइंसेज और बायोटेक्नोलॉजी में शोध को बढ़ावा देगी और बायो-ई3 फ्रेमवर्क (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए बायोटेक्नोलॉजी) को मज़बूत आधार प्रदान करेगी।
इसी कड़ी में, ओडिशा मरीन बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन कॉरिडोर (OMBRIC) को भी एक सहयोगी मंच के तौर पर विकसित किया जा रहा है। OMBRIC पहले ही आईआईटी भुवनेश्वर, बरहमपुर यूनिवर्सिटी, एनआईटी राउरकेला और आईआईएसईआर बरहमपुर जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ साझेदारी कर चुका है।
योजना के प्रमुख क्षेत्र
डॉ. सिंह ने कहा कि भारत के उभरते परमाणु और समुद्री रोडमैप में पूर्वी तटीय क्षेत्र की बड़ी भूमिका हो सकती है, और ओडिशा इसमें महत्वपूर्ण योगदान देने की स्थिति में है। चर्चा में शामिल मुख्य विषयों में समुद्री बायोटेक्नोलॉजी का विस्तार, लाइफ साइंसेज के बुनियादी ढांचे को मज़बूत करना, और राज्य के तटीय व खनिज संसाधनों का बेहतर उपयोग शामिल था। इसके अलावा, दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ) की खोज और वैज्ञानिक बुनियादी ढांचे पर भी बात हुई।
इस रोडमैप का एक और उद्देश्य समुद्री विज्ञान, पृथ्वी विज्ञान, बायोटेक्नोलॉजी और खनिज-संसाधन शोध की विशेषज्ञता को एक साथ लाना है। इससे ओडिशा के तटीय संसाधनों की वैज्ञानिक समझ बढ़ेगी और उनका सतत उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। साथ ही, राज्य की अंतरिक्ष क्षमताओं को इसरो (ISRO) के साथ जोड़ने पर भी विचार किया गया, जिसमें पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड में स्पेस रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग सेंटर बनाने की संभावना भी शामिल है।
इनपुट: IANS



