सऊदी-पाकिस्तान-तुर्किए गठबंधन पर इजरायल की तीखी प्रतिक्रिया, कहा - 'इस्लामिक नाटो निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं'
इजरायल के एक पूर्व शीर्ष प्रवक्ता ने सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच संभावित रक्षा समझौते को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने इस गठबंधन को 'इस्लामिक नाटो' की संज्ञा देते हुए कहा है कि इससे यह…
इजरायल के एक पूर्व शीर्ष प्रवक्ता ने सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच संभावित रक्षा समझौते को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने इस गठबंधन को 'इस्लामिक नाटो' की संज्ञा देते हुए कहा है कि इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि पाकिस्तान इस क्षेत्र में कोई निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं हो सकता। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता एयलॉन लेवी ने यह भी कहा कि हमास से स्वेच्छा से हथियार डालने की उम्मीद करना एक बड़ी भूल होगी।
लेवी ने अपने बयान में जोर देकर कहा, "कोई भी यह नहीं मानता कि हमास अपनी मर्जी से हथियार छोड़ देगा और यह एक गलतफहमी है कि हमास से ऐसा करने की उम्मीद करने वाला कोई प्लान बनाया जाए।" उन्होंने कहा कि हमास ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने हथियारों का इस्तेमाल इजरायल को गाजा से पीछे हटने के लिए मजबूर करने हेतु करना चाहता है। लेवी ने साफ किया कि इजरायल 7 अक्टूबर जैसे अत्याचार करने वाली 'आतंकवादी सेना' को अपनी सीमा के पास फिर से संगठित होने की अनुमति कभी नहीं देगा।
पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल
सऊदी-पाकिस्तान-तुर्किए रक्षा समझौते की संभावना पर एयलॉन लेवी ने कहा, "मुझे लगता है कि इस्लामिक नाटो बनने से यह बहुत साफ हो गया है कि पाकिस्तान कोई निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं है। यह इस इलाके के दूसरे कट्टरपंथी तत्वों के साथ मिलकर काम कर रहा है।"
अपनी बात को पुष्ट करने के लिए उन्होंने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ के हालिया बयानों का हवाला दिया। लेवी ने कहा, "याद रखें, पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसके रक्षा मंत्री ने कहा था कि इजरायल एक कैंसर वाला देश है, यहूदियों को जहन्नुम में जाना चाहिए और जिसने अभी कुछ दिन पहले कहा था कि इस्लामिक दुनिया को इजरायल के खिलाफ एक साथ आना चाहिए।"
'इस्लामिक नाटो' की संयुक्त शक्ति
लेवी ने इस तथाकथित 'इस्लामिक नाटो' की सामूहिक क्षमताओं का भी विश्लेषण किया। उनके मुताबिक, इसमें अरब दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (सऊदी अरब), यूरोप की सबसे बड़ी थल सेना (तुर्किए), और मुस्लिम दुनिया की एकमात्र परमाणु शक्ति (पाकिस्तान) एक साथ आ रही हैं। उन्होंने सऊदी अरब की ऊर्जा आपूर्ति, तुर्किए की ड्रोन तकनीक और पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के साथ-साथ आतंकवादी समूहों को उसके समर्थन का भी जिक्र किया।
इनपुट: IANS



