भारत-अमेरिका व्यापार तनाव: ट्रंप और मोदी मिलकर निकालेंगे हल- व्हाइट हाउस
व्हाइट हाउस के एक शीर्ष व्यापार सलाहकार ने भरोसा जताया है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधी मुद्दों, विशेषकर टैरिफ विवाद को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपसी बातचीत से…
व्हाइट हाउस के एक शीर्ष व्यापार सलाहकार ने भरोसा जताया है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधी मुद्दों, विशेषकर टैरिफ विवाद को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपसी बातचीत से सुलझा लेंगे। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने मंगलवार को कहा कि दोनों नेताओं के बीच बेहतरीन कामकाजी रिश्ते हैं और वे इस मामले का समाधान निकाल लेंगे।
यह टिप्पणी एक ऐसे विधेयक के संदर्भ में आई है, जिसमें रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। एक पत्रकार के सवाल के जवाब में नवारो ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री के बीच बहुत अच्छे कार्य संबंध हैं। वे इस मुद्दे को आपस में सुलझा लेंगे। इस मामले में उनके बीच आकर टिप्पणी करना मेरा काम नहीं है।"
रूसी तेल खरीद और अमेरिकी चिंता
जब नवारो से पूछा गया कि क्या प्रस्तावित टैरिफ से भारत-अमेरिका संबंधों पर और दबाव पड़ सकता है, तो उन्होंने सीधे जवाब देने के बजाय अपने एक पुराने लेख का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन पर हमले के बाद भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद में काफी वृद्धि हुई थी, जबकि युद्ध से पहले भारत इस व्यापार में ज्यादा शामिल नहीं था।
नवारो ने यह भी आरोप लगाया कि भारत रूसी तेल से बने उत्पादों की बिक्री कर रहा था, जिससे रूस को अपना युद्ध जारी रखने में आर्थिक मदद मिली। हालांकि, उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में कोई आंकड़े पेश नहीं किए। उन्होंने आगे कहा, "यह मुद्दा अब हल हो चुका है। हो सकता है कि मेरे उस लेख की भी इसमें कुछ भूमिका रही हो," लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह समस्या कैसे हल हुई।
विधेयक और टैरिफ नीति
पिछले सप्ताह ही अमेरिकी सीनेट ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' को 86-11 के बहुमत से पारित किया था। यह कानून रूसी तेल और गैस के पांच सबसे बड़े खरीदार देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान करता है। हालांकि, इस विधेयक में भारत का नाम अनिवार्य रूप से शामिल नहीं किया गया है।
नवारो ने ट्रंप प्रशासन की व्यापक टैरिफ नीति का बचाव करते हुए कहा कि इसके कारण विदेशी कंपनियां अमेरिका में निवेश कर रही हैं और उत्पादन इकाइयां स्थापित कर रही हैं, जिससे घरेलू निवेश को भी बढ़ावा मिल रहा है।
इनपुट: IANS



