अरुणाचल प्रदेश पर भारत का चीन को कड़ा संदेश: विदेशी मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने बताया महत्व
भारत द्वारा अरुणाचल प्रदेश में 27 स्थानों के नामकरण को विदेशी मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने चीन के लिए एक कूटनीतिक संदेश से कहीं बढ़कर बताया है। समाचार एजेंसी IANS के साथ एक विशेष बातचीत में…
भारत द्वारा अरुणाचल प्रदेश में 27 स्थानों के नामकरण को विदेशी मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने चीन के लिए एक कूटनीतिक संदेश से कहीं बढ़कर बताया है। समाचार एजेंसी IANS के साथ एक विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का एक अभिन्न अंग है और भारत अपनी अखंडता से कोई समझौता नहीं करेगा।
अव्वद ने कहा, "मुझे लगता है कि यह भारत की तरफ से चीन को एक डिप्लोमैटिक मैसेज से कहीं ज्यादा है, यह सुनिश्चित करने के लिए कि अरुणाचल प्रदेश भारत का एक जरूरी हिस्सा है और भारत अपनी किसी भी अखंडता और चीन के साथ किसी भी इलाके के विवाद से कोई समझौता नहीं करेगा, खासकर जब बात अरुणाचल प्रदेश की हो।"
सीमा पर शांति और संवाद की वकालत
भारत-चीन सीमा पर तनाव के मुद्दे पर अव्वाद का मानना है कि इस तरह की दिक्कतें एशिया के दो बड़े देशों के संबंधों को खराब नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को बिना किसी उलझन के अपनी समस्याओं को सुलझाना चाहिए। उन्होंने कहा, "पिछले सात दशकों से, हमने सीमा पर शांति देखी है, व्हाइट वेपन (बिना बारूद वाले हथियार) के साथ कुछ झड़पों को छोड़कर, लेकिन इसके अलावा, एशिया के दो बड़े देशों के बीच हमेशा स्थिरता रहा है।"
उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों देशों को बातचीत जारी रखनी चाहिए और सेनाओं के बीच सीमा पर बैठकें भी होती रहनी चाहिए, जिससे अन्य मुद्दों को सुलझाने में मदद मिलेगी।
भारत-बांग्लादेश संबंध और शेख हसीना का मामला
भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों पर टिप्पणी करते हुए वाइल अव्वाद ने संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत का करीबी और मित्र देश है। उन्होंने उल्लेख किया कि शेख हसीना के कार्यकाल में संबंध बहुत अच्छे थे, लेकिन नई सरकार में तनाव अधिक था।
शेख हसीना के प्रत्यर्पण के सवाल पर अव्वाद ने कहा कि उन्होंने भारत में कोई आपराधिक कार्य नहीं किया है और वह कानूनी रूप से रह रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, "अगर हसीना ने कोई अपराध किया होता भारत के अंदर तो उन पर कार्रवाई की जा सकती थी।" उन्होंने बताया कि हसीना खुद वापस जाना चाहती हैं लेकिन उनके पास पासपोर्ट जैसे जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, इसलिए दोनों देशों को बातचीत के जरिए इसका समाधान निकालना चाहिए।
इनपुट: IANS



