भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: प्रतिबद्धता कायम, लेकिन नए अमेरिकी टैरिफ से बढ़ी अनिश्चितता
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता बनी हुई है, लेकिन अमेरिकी जांच और नए टैरिफ से जुड़ी चिंताओं ने इस पर अनिश्चितता के बादल डाल दिए हैं…
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता बनी हुई है, लेकिन अमेरिकी जांच और नए टैरिफ से जुड़ी चिंताओं ने इस पर अनिश्चितता के बादल डाल दिए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने गुरुवार को पुष्टि की कि दोनों देश इस साल फरवरी में बनी सहमति की रूपरेखा पर आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
अग्रवाल ने मीडिया को बताया, “हमारा मानना है कि दोनों पक्ष फरवरी में जिस रूपरेखा पर सहमत हुए थे, उसे आगे बढ़ाने और अंतिम रूप देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।” उन्होंने यह भी साफ किया कि व्यापार समझौते को लेकर अमेरिकी पक्ष के साथ नियमित तौर पर बातचीत जारी है।
व्यापार समझौते पर अमेरिकी कदमों का साया
फरवरी में BTA के पहले चरण को लेकर दोनों देशों के बीच अच्छी प्रगति हुई थी। हालांकि, अमेरिका में कुछ नए घटनाक्रमों के कारण स्थिति बदल गई है। अमेरिका में 'धारा 301' के तहत एक जांच चल रही है, जो कथित तौर पर जबरन श्रम से जुड़ी चिंताओं पर केंद्रित है। इसी जांच के चलते भारत से होने वाले निर्यात पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा है। इसके अलावा, अमेरिकी सीनेट ने एक प्रतिबंध विधेयक भी पारित किया है। इसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, से आयातित वस्तुओं पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। पश्चिमी देशों का मानना है कि रूस से तेल आयात करने से उसे यूक्रेन युद्ध के लिए वित्तीय मदद मिलती है।
ऊर्जा आयात में भारत की बदली रणनीति
रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात हाल के महीनों में काफी बढ़ा है। जुलाई में देश के कुल तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी आधे से ज्यादा थी। हालांकि, अमेरिकी विधायी प्रक्रिया पर टिप्पणी करते हुए वाणिज्य सचिव ने इसे अमेरिका का "आंतरिक मामला" बताया और इस पर आगे कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
राजेश अग्रवाल ने यह भी बताया कि भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आयात के स्रोतों में काफी विविधता लाई है। ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बाद भारत अब 27 के बजाय 41 देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है। इसी तरह, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के आयात के लिए भी स्रोतों की संख्या 6 से बढ़कर 15 हो गई है, जिसमें अमेरिका एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक अनिश्चितता के बीच आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत रखना बेहद अहम है।
इनपुट: IANS



