BPSC: 16 घंटे की पढ़ाई से लेकर चौथे प्रयास तक, बिहार के सफल अभ्यर्थियों की संघर्ष और सफलता की कहानियां
बिहार में 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा में सफल हुए 2,027 युवाओं के लिए मंगलवार का दिन यादगार बन गया। पटना के बापू सभागार में आयोजित एक समारोह में उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपे गए, जो उनके…
बिहार में 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा में सफल हुए 2,027 युवाओं के लिए मंगलवार का दिन यादगार बन गया। पटना के बापू सभागार में आयोजित एक समारोह में उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपे गए, जो उनके वर्षों के संघर्ष और मेहनत का प्रतीक था। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इन सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए, जिनमें बिहार प्रशासनिक सेवा, एसडीएम, डीएसपी और ग्रामीण विकास अधिकारी जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर चयनित उम्मीदवार शामिल थे।
नियुक्ति पत्र हाथ में थामे इन युवाओं के चेहरे पर खुशी और संतोष का भाव साफ झलक रहा था। यह सफलता किसी के लिए पहले प्रयास की खुशी थी, तो किसी के लिए सालों के धैर्य का मीठा फल। हर सफल उम्मीदवार के पीछे परिवार के त्याग, अटूट समर्थन और अपनी लगन की एक अनूठी कहानी थी।
किसानों के बेटे से लेकर BSNL इंजीनियर तक की सफलता
मध्य प्रदेश के दमोह जिले के एक किसान परिवार से आने वाले आदित्य जैन के लिए यह उपलब्धि बेहद खास है। ग्रामीण विकास अधिकारी (RDO) के पद पर चयनित आदित्य अपने गांव से इस मुकाम तक पहुंचने वाले पहले व्यक्ति हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता अशोक जैन एक छोटे किसान हैं, लेकिन परिवार के सहयोग, खासकर बड़े भाई के प्रोत्साहन ने उन्हें हमेशा हिम्मत दी। उनके पिता के मुताबिक, आदित्य कई बार 16-16 घंटे तक पढ़ाई करते थे। उनकी मां राजमणि जैन ने भावुक होते हुए बताया कि बेटा पढ़ाई में इतना खो जाता था कि उसे फोन करके खाना खाने के लिए याद दिलाना पड़ता था।
इसी तरह, नागमणि कुमार का चयन बिहार प्रशासनिक सेवा में हुआ है। यह उनका चौथा प्रयास और चौथा साक्षात्कार था। वह पिछले 12 वर्षों से BSNL में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे, लेकिन सिविल सेवा में जाने का सपना उन्होंने जिंदा रखा और आखिरकार सफलता हासिल की।
लंबे संघर्ष और धैर्य की जीत
कई अन्य सफल अभ्यर्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। शशांक गौरव ने मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र मिलने को "जीवन का बेहद महत्वपूर्ण और यादगार पल" बताया और अपने पिता सुभाष ओझा को प्रेरणा स्रोत कहा। वहीं, बिहार प्रशासनिक सेवा के लिए चयनित कविता कुमारी ने डेंटिस्ट्री की पढ़ाई के बाद सिविल सेवा के अपने लक्ष्य को पूरा किया। उन्होंने बताया कि 69वीं BPSC में वह मुख्य परीक्षा में असफल रही थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
भाव्या कृति ने एक अभ्यर्थी से अधिकारी बनने के सफर को लंबा और चुनौतीपूर्ण बताते हुए कहा, "इस सफर में सिर्फ बौद्धिक क्षमता ही नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती की भी जरूरत होती है।" अमरदीप कुमार ने भी प्रतियोगी परीक्षाओं में धैर्य बनाए रखने की सलाह दी और कहा कि पद ग्रहण करने के बाद उनकी प्राथमिकता अपनी जिम्मेदारियों को सही ढंग से निभाना होगी।
इनपुट: IANS



