गुरूवार, 13 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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अभिमन्यु हत्याकांड: अदालती चेतावनी के बाद पेश हुए सभी 16 आरोपी, मुकदमे का रास्ता साफ़

केरल के चर्चित अभिमन्यु हत्याकांड में सात साल से अधिक के लंबे इंतज़ार के बाद अब मुकदमे की कार्यवाही शुरू होने की उम्मीद जगी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गुरुवार को सभी 16 आरोपी एर्नाकुलम की…

अभिमन्यु हत्याकांड: अदालती चेतावनी के बाद पेश हुए सभी 16 आरोपी, मुकदमे का रास्ता साफ़
(फोटो: IANS)

केरल के चर्चित अभिमन्यु हत्याकांड में सात साल से अधिक के लंबे इंतज़ार के बाद अब मुकदमे की कार्यवाही शुरू होने की उम्मीद जगी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गुरुवार को सभी 16 आरोपी एर्नाकुलम की प्रिंसिपल सेशंस कोर्ट में पेश हुए, जिसके बाद 17 अगस्त से ट्रायल शुरू होना तय हुआ है। यह मामला 2018 में महाराजा कॉलेज के छात्र और SFI कार्यकर्ता अभिमन्यु की हत्या से जुड़ा है।

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अदालत की बार-बार की चेतावनियों के बाद यह पेशी हुई है। आरोपी, जिन पर कैंपस फ्रंट और पॉपुलर फ्रंट से जुड़े होने का आरोप है, पहले दो मौकों पर अदालत के आदेश के बावजूद हाज़िर नहीं हुए थे। इस बार कोर्ट द्वारा कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बाद वे पेश हुए। अदालत में सभी 16 आरोपियों को नए सिरे से तय किए गए आरोप पढ़कर सुनाए गए, जिसके जवाब में उन्होंने खुद को बेगुनाह बताया। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आई तेज़ी

इस मामले में हालिया प्रगति केरल हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद हुई है। अभिमन्यु की मां ने 2024 में हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मुकदमे में हो रही देरी पर सवाल उठाया था, जिसके बाद हाई कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया। शुरुआत में 24 जनवरी को हाई कोर्ट ने सेशंस कोर्ट को नौ महीने में कार्यवाही पूरी करने का निर्देश दिया था। हाल ही में, उसने ट्रायल पूरा करने के लिए चार महीने की अंतिम मोहलत दी और स्पष्ट किया कि इसके बाद और समय नहीं दिया जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना 1 जुलाई 2018 की है, जब महाराजा कॉलेज कैंपस में पोस्टर लगाने को लेकर हुए विवाद के बाद झड़प हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, प्रतिबंधित 'कैंपस फ्रंट' से जुड़े आरोपियों ने छात्रों पर हमला कर दिया। इस हमले में 21 वर्षीय SFI कार्यकर्ता अभिमन्यु को चाकू मार दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना में चार अन्य SFI कार्यकर्ता भी घायल हुए थे।

एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस ने सितंबर 2018 में चार्जशीट दाखिल कर दी थी और आरोपियों पर हत्या, आपराधिक साजिश और दंगा जैसे आरोप लगाए थे। हालांकि, मामला सात साल से अधिक समय तक अटका रहा। इस दौरान कोर्ट की हिरासत से महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों के कथित तौर पर गायब होने का विवाद भी सामने आया था, जिन्हें बाद में फिर से तैयार किया गया। अब अभियोजन पक्ष पर हाई कोर्ट द्वारा दी गई समय-सीमा के भीतर मुकदमा पूरा करने की चुनौती है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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