दिल्ली: 'साइकिल घोटाले' के आरोपों पर विधानसभा में हंगामा, AAP विधायकों को सदन से निकाला गया
दिल्ली विधानसभा में सोमवार को उस वक्त भारी हंगामा हुआ जब आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों ने स्कूली बच्चों के लिए साइकिल खरीद में कथित घोटाले का मुद्दा उठाया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक…
दिल्ली विधानसभा में सोमवार को उस वक्त भारी हंगामा हुआ जब आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों ने स्कूली बच्चों के लिए साइकिल खरीद में कथित घोटाले का मुद्दा उठाया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, 'आप' विधायकों ने इस विषय पर सदन में चर्चा की मांग की, लेकिन अनुमति न मिलने पर उन्होंने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष के साथ तीखी नोकझोंक हुई और कुछ विधायकों को सदन से बाहर निकाल दिया गया।
आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि स्कूली छात्रों को दी जाने वाली साइकिलों को बाजार मूल्य से लगभग दोगुनी कीमत पर खरीदा गया है। पार्टी ने इस पूरी खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए सरकार और विधानसभा अध्यक्ष पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया है।
क्या हैं 'साइकिल घोटाले' के आरोप?
पार्टी के चीफ व्हीप संजीव झा ने दावा किया कि जिस साइकिल की बाजार में कीमत करीब 4,000 रुपये है, उसे सरकार लगभग 7,000 रुपये में खरीद रही है। उन्होंने कहा कि लगभग 1 लाख 30 हजार साइकिलों की खरीद में प्रति साइकिल करीब 3,000 रुपये का अंतर है, जिससे यह मामला लगभग 70 करोड़ रुपये की कथित कमीशनखोरी या वित्तीय अनियमितता का बनता है। तिलक नगर से 'आप' विधायक जरनैल सिंह ने भी इन आरोपों को दोहराया।
टेंडर प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
संजीव झा ने टेंडर प्रक्रिया को भी सवालों के घेरे में खड़ा किया। उन्होंने बताया कि साइकिल बनाने वाली कंपनी हीरो ने भी टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लिया था, लेकिन ठेका उसे न देकर एक व्यापारी को दे दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि एक निर्माता के मुकाबले कोई व्यापारी सस्ता टेंडर कैसे दे सकता है। 'आप' नेता ने यह भी आरोप लगाया कि टेंडर से पहले अनिवार्य 'प्री-बिड मीटिंग' भी नहीं हुई, और एक बोलीदाता ने इस संबंध में केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) में शिकायत भी दर्ज कराई थी।
'विपक्ष की आवाज दबाई जा रही'
'आप' विधायकों ने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष सरकार का बचाव कर रहे हैं और विपक्ष को महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने की अनुमति नहीं दे रहे। संजीव झा ने कहा, "यदि सदन में विपक्ष को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिलेगा तो सरकार से जवाब कैसे मांगा जाएगा?" उन्होंने बताया कि विधायक कुलदीप कुमार, सोमदत्त और प्रेम चौहान समेत कई सदस्य नियम 55 के तहत इस पर चर्चा करना चाहते थे, लेकिन उन्हें बोलने का मौका दिए बिना सदन से बाहर कर दिया गया। जरनैल सिंह ने जांच एजेंसियों की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए और कहा कि इतनी बड़ी अनियमितता के बावजूद ईडी, पुलिस या सीबीआई ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
इनपुट: IANS



