बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
स्वास्थ्य

त्वचा रोगों के इलाज में अब आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी के लिए भी मानक तय, आयुष मंत्रालय ने जारी किए दिशानिर्देश

त्वचा संबंधी बीमारियों के इलाज में पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को और प्रभावी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी के लिए मानक…

त्वचा रोगों के इलाज में अब आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी के लिए भी मानक तय, आयुष मंत्रालय ने जारी किए दिशानिर्देश
(फोटो: IANS)

त्वचा संबंधी बीमारियों के इलाज में पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को और प्रभावी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी के लिए मानक उपचार दिशानिर्देश (Standard Treatment Guidelines) जारी कर दिए हैं, जिसमें योग को भी एक महत्वपूर्ण अंग के रूप में शामिल किया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य त्वचा रोगों के लिए आयुष चिकित्सा में एकरूपता, गुणवत्ता और साक्ष्य-आधारित देखभाल सुनिश्चित करना है।

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इन नए मानकों से सोरायसिस, विटिलिगो (सफेद दाग), डर्मेटाइटिस और त्वचा से जुड़ी अन्य सामान्य समस्याओं के लिए आयुष उपचार को मानकीकृत करने में मदद मिलेगी। ये दिशानिर्देश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के आयुष विभाग द्वारा तैयार किए गए हैं।

क्या है इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य?

इस पहल पर आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने कहा, "ये दिशानिर्देश सामान्य त्वचा रोगों के लिए सुरक्षित, प्रभावी और समग्र देखभाल को बढ़ावा देने हेतु प्रणाली-विशिष्ट नैदानिक दृष्टिकोणों को समकालीन वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ जोड़ते हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि इससे आयुष प्रणालियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के साथ बेहतर ढंग से एकीकृत करने में सहायता मिलेगी।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा के अनुसार, यह कदम आयुष चिकित्सा में मानकीकरण और साक्ष्य-आधारित अभ्यास को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा, "ये प्रत्येक प्रणाली के मूल सिद्धांतों को संरक्षित करते हुए रोकथाम, निदान, उपचार और फॉलो-अप के लिए व्यावहारिक सुझाव देते हैं।"

कैसे तैयार हुए ये मानक?

इन दिशानिर्देशों को 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर सार्वजनिक किया गया। इन्हें बनाने की प्रक्रिया में आयुष अनुसंधान परिषदों, वरिष्ठ अकादमिक विशेषज्ञों, योग विशेषज्ञों और आधुनिक चिकित्सा के जानकारों ने मिलकर काम किया है। इन्हें व्यावहारिक बनाने के लिए दिल्ली सरकार के आयुष निदेशालय के साथ मिलकर प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों के साथ इनका फील्ड-टेस्ट भी किया गया।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. लवनीश जी. कृष्णा ने इस बहु-विषयक सहयोग को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ये दिशानिर्देश आयुष चिकित्सकों को सुरक्षित, प्रभावी और मरीज़-केंद्रित देखभाल प्रदान करने में मदद करेंगे। दिशानिर्देशों में सोरायसिस, डर्मेटाइटिस, विटिलिगो और पित्ती जैसी आम त्वचा समस्याओं की रोकथाम से लेकर उपचार तक के लिए विशिष्ट सिफारिशें शामिल हैं।

इनपुट: IANS

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