शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
स्वास्थ्य

मानसिक स्वास्थ्य का सहारा बनी 'टेली-मानस' हेल्पलाइन, दो साल में आए 47 लाख से ज़्यादा कॉल

भारत की राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन 'टेली-मानस' लॉन्च होने के बाद से अब तक 47 लाख से ज़्यादा लोगों के लिए मददगार साबित हुई है। 10 अक्टूबर, 2022 को शुरू की गई इस टोल-फ्री सेवा ने देश में…

मानसिक स्वास्थ्य का सहारा बनी 'टेली-मानस' हेल्पलाइन, दो साल में आए 47 लाख से ज़्यादा कॉल
(फोटो: IANS)

भारत की राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन 'टेली-मानस' लॉन्च होने के बाद से अब तक 47 लाख से ज़्यादा लोगों के लिए मददगार साबित हुई है। 10 अक्टूबर, 2022 को शुरू की गई इस टोल-फ्री सेवा ने देश में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को आसान बनाने में अहम भूमिका निभाई है, खासकर युवाओं और महिलाओं के बीच यह काफी लोकप्रिय हुई है।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह जानकारी विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सामने आई है, जिसे हर साल 10 अक्टूबर को मनाया जाता है। सरकार के मुताबिक, 14416 हेल्पलाइन नंबर के ज़रिए लोगों को 24 घंटे मुफ्त और गोपनीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। अब तक इस पर 47,75,644 कॉल दर्ज की जा चुकी हैं।

कौन और क्यों कर रहा है संपर्क?

आंकड़े बताते हैं कि हेल्पलाइन का उपयोग करने वालों में एक बड़ी संख्या युवाओं और कामकाजी उम्र के लोगों की है। कुल कॉल करने वालों में 73.2% लोग 18 से 45 वर्ष के आयु वर्ग के हैं। ये लोग मुख्य रूप से भावनात्मक परेशानी, चिंता, तनाव, परीक्षा और रिश्तों से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ नींद न आने जैसी समस्याओं के लिए परामर्श ले रहे हैं।

यह सेवा महिलाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण सहारा बनकर उभरी है। कुल 13,35,275 कॉलर्स में से 43.78% (5,84,587) महिलाएं थीं, जबकि 54.18% पुरुष थे। यह दर्शाता है कि घर बैठे फ़ोन पर परामर्श की सुविधा ने महिलाओं के लिए मदद मांगना सुगम बनाया है।

देशभर में पहुंच और अन्य पहलें

टेली-मानस कार्यक्रम के तहत देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 53 सेल सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। यह बहुभाषी सेवा दूर-दराज के उन इलाकों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है, जहां विशेषज्ञों तक पहुंच मुश्किल होती है। प्रशिक्षित काउंसलर से बातचीत के अलावा, ज़रूरत पड़ने पर कॉलर्स को विशेषज्ञ सेवाओं से भी जोड़ा जाता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने 'एमएएनएन' (MANN) जागृति पहल के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कलंक को खत्म करने और सामुदायिक जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया है। इसके अलावा, देश के 767 जिलों में जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम को मंजूरी दी गई है और 1.83 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में भी मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत किया गया है।

इनपुट: IANS

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News4Social हेल्थ डेस्क

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