अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय पर अमेरिका ने लगाए संस्थागत प्रतिबंध, ICC ने बताया 'अभूतपूर्व हमला'
अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) और अमेरिका के बीच तनाव शुक्रवार को और गहरा गया, जब वाशिंगटन ने वैश्विक न्यायाधिकरण पर संस्थागत प्रतिबंध लगा दिए। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अमेरिकी विदेश सचिव…
अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) और अमेरिका के बीच तनाव शुक्रवार को और गहरा गया, जब वाशिंगटन ने वैश्विक न्यायाधिकरण पर संस्थागत प्रतिबंध लगा दिए। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने इस फैसले की घोषणा करते हुए साफ किया कि वाशिंगटन अपने नागरिकों, सैन्य कर्मियों या राजनीतिक नेताओं पर अदालत के अधिकार क्षेत्र को कभी स्वीकार नहीं करेगा।
हालांकि, इन प्रतिबंधों के साथ ही कुछ गतिविधियों और परिचालन कार्यों के लिए 180 दिनों की छूट भी दी गई है, ताकि राजनयिक समाधान की गुंजाइश बनी रहे। ये प्रतिबंध राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा जारी कार्यकारी आदेश 14203 के तहत लगाए गए हैं, जो अदालत की कुछ जांचों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ प्रतिबंधों को अधिकृत करता है। विदेश विभाग के मुताबिक, इस आदेश के तहत पहले 17 लोगों पर प्रतिबंध लगाए जा चुके थे, और अब इसे पूरी संस्था तक बढ़ा दिया गया है।
प्रतिबंध और मिली छूट
नए आदेश के तहत ICC की अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में आने वाली संपत्ति और उससे जुड़े हितों को ब्लॉक कर दिया गया है। इसके बावजूद, अमेरिकी वित्त विभाग ने कई सामान्य लाइसेंस जारी किए हैं, जो कुछ गतिविधियों को जारी रखने की अनुमति देते हैं। इनमें अदालत के संचालन को बनाए रखने के लिए 180 दिन का प्राधिकरण, सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं (जैसे क्लाउड कंप्यूटिंग और सॉफ्टवेयर), पेंशन व्यवस्था और ICC के बंदियों से संबंधित गतिविधियों के लिए अलग-अलग प्राधिकरण शामिल हैं। विदेश विभाग का कहना है कि यह अस्थायी छूट सदस्य देशों को अमेरिकी चिंताओं को दूर करने के लिए समय देने के उद्देश्य से दी गई है।
ICC की कड़ी प्रतिक्रिया
हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने इन प्रतिबंधों को सिरे से खारिज कर दिया है। ICC ने इसे एक स्वतंत्र न्यायिक संस्था पर 'अभूतपूर्व हमला' करार दिया और चेतावनी दी कि इससे युद्ध अपराधों जैसे गंभीर मामलों पर मुकदमा चलाने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को खतरा हो सकता है।
ICC ने एक बयान में कहा, "यह कदम एक स्वतंत्र न्यायिक संस्था को निशाना बनाता है, जिसे संधि द्वारा बनाया गया है और 125 सदस्य देशों द्वारा नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराधों, युद्ध अपराधों और आक्रामकता के अपराध की जांच और अभियोजन का जिम्मा सौंपा गया है।" ICC अध्यक्ष टोमोको अकाने ने कहा कि न्यायाधिकरण प्रतिबंधों के बावजूद अपना काम जारी रखेगा। उन्होंने कहा, "अदालत पूरी स्वतंत्रता और निष्पक्षता के साथ, केवल कानून और सबूतों के आधार पर, गंभीर अपराधों के असंख्य पीड़ितों के लिए अपना जनादेश पूरी तरह से निभाती रहेगी।"
अमेरिका का कड़ा रुख
अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने अपने बयान में कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप कभी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय को अमेरिकियों पर मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं देंगे। इसीलिए संयुक्त राज्य अमेरिका अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय पर प्रतिबंध लगा रहा है। हम इस दुष्ट अदालत के साथ लेन-देन पर प्रतिबंध लगाएंगे, उनके संसाधनों को काट देंगे और उनके संचालन की क्षमता को पंगु बना देंगे।" रुबियो ने यह भी चेतावनी दी कि अगर बातचीत विफल रही तो "या तो आईसीसी अपनी धमकियां खत्म करेगा या हम आईसीसी को खत्म कर देंगे।"
उल्लेखनीय है कि संयुक्त राज्य अमेरिका कभी भी ICC में शामिल नहीं हुआ, जिसकी स्थापना रोम संविधि के तहत गंभीर अपराधों पर मुकदमा चलाने के लिए की गई थी।
इनपुट: IANS



