मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग: राष्ट्रपति ने विपक्ष से मांगे सबूत, कहा- प्रक्रिया का पालन होगा
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने अपना अभियान तेज कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और…
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने अपना अभियान तेज कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वामपंथी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर उन्हें इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा। मुलाकात के बाद नेताओं ने बताया कि राष्ट्रपति ने उनकी बातें सुनने के बाद इस मामले से जुड़े सबूत पेश करने को कहा है।
समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय के मुताबिक, राष्ट्रपति ने विपक्ष के दावों को न तो गलत बताया और न ही खारिज किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने आश्वासन दिया है कि वह अपने अधिकार क्षेत्र के तहत कार्रवाई करेंगी, लेकिन इसके लिए कुछ प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। कांग्रेस नेता रागिनी नायक ने भी इस मुलाकात को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने वोट चोरी के आरोपों को सीधे तौर पर खारिज नहीं किया।
विपक्ष का अगला कदम: सुप्रीम कोर्ट
विपक्षी दल अब इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के समक्ष उठाने की तैयारी में हैं। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने पुष्टि की कि राष्ट्रपति द्वारा मांगे गए सबूत जल्द ही सौंपे जाएंगे और वे यही ज्ञापन लेकर सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे। कांग्रेस नेता रागिनी नायक ने बताया कि 12 अक्टूबर को विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल CJI से मुलाकात करेगा। यह कदम राहुल गांधी द्वारा शुरू किए गए 'सत्याग्रह' का हिस्सा बताया जा रहा है।
क्या हैं विपक्ष के आरोप?
विपक्ष का मुख्य आरोप फॉर्म-6 में कथित गड़बड़ी से जुड़ा है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव एमए बेबी ने कहा कि जब चुनाव आयोग के दो-तिहाई सदस्यों ने इस गड़बड़ी को स्वीकार किया, तो CEC ज्ञानेश कुमार ने दावा किया कि ये बदलाव सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी से हुए थे। विपक्ष का कहना है कि मुख्य न्यायाधीश ने इस दावे को सही नहीं बताया है। सीपीआई नेता डी राजा ने दावा किया कि इस मुद्दे को लेकर देशभर में लोगों में गुस्सा है, जिसके चलते यह कदम उठाया गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राष्ट्रपति के सामने पूरा ज्ञापन पढ़कर सुनाया, जिसके बाद कई पहलुओं पर चर्चा हुई।
इनपुट: IANS



