शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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नोबेल शांति पुरस्कार पर विवाद: इजरायली PM नेतन्याहू ने नावी पिल्लै को सम्मान देने के फैसले को 'नैतिक दिवालियापन' बताया

भारतीय मूल की जानी-मानी न्यायविद नवनेथम 'नावी' पिल्लै को 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित करने के ऐलान पर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने नोबेल…

नोबेल शांति पुरस्कार पर विवाद: इजरायली PM नेतन्याहू ने नावी पिल्लै को सम्मान देने के फैसले को 'नैतिक दिवालियापन' बताया
(फोटो: IANS)

भारतीय मूल की जानी-मानी न्यायविद नवनेथम 'नावी' पिल्लै को 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित करने के ऐलान पर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने नोबेल समिति के इस निर्णय की कड़ी आलोचना करते हुए इसे 'नैतिक दिवालियापन' करार दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, नेतन्याहू ने पिल्लै पर इजरायल के खिलाफ नफरत फैलाने और झूठे मामलों को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया है।

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नेतन्याहू ने अपने बयान में कहा, "नोबेल पुरस्कार समिति ने अपनी नैतिक समझ खो दी है। उसने अपना सर्वोच्च सम्मान एक ऐसी कट्टरपंथी महिला को दिया है, जिस पर इजराइल के खिलाफ झूठे आरोप और नकारात्मक प्रचार फैलाने के आरोप लगते रहे हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि पिल्लै ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के पूर्व अभियोजक करीम खान द्वारा तैयार किए गए फर्जी मामलों को वैधता दी।

नेतन्याहू के प्रमुख आरोप

इजरायली प्रधानमंत्री ने दावा किया कि करीम खान पर उनके ही कर्मचारियों ने बलात्कार और यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। नेतन्याहू के मुताबिक, खान ने इजरायल के खिलाफ मामला बनाने के लिए नावी पिल्लै की बातों का सहारा लिया। उन्होंने कहा, "पिल्ले ने आरोपों को आधार दिया और खान ने उनका इस्तेमाल इजरायल के खिलाफ कार्रवाई के लिए किया।" नेतन्याहू ने नोबेल समिति पर एक ऐसी शख्सियत को सम्मानित करने का आरोप लगाया, जिसने उनके अनुसार इजरायल के विरुद्ध दुष्प्रचार और अन्यायपूर्ण अभियान को आगे बढ़ाया।

नोबेल समिति ने क्यों चुना नावी पिल्लै को?

दूसरी ओर, नॉर्वे की नोबेल समिति ने एक बिल्कुल अलग तस्वीर पेश की है। समिति ने शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने में नावी पिल्लै के असाधारण योगदान के लिए उन्हें यह सम्मान देने की घोषणा की। समिति के अनुसार, "साल 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार उस व्यक्ति को दिया जा रहा है, जिसने असाधारण साहस और ईमानदारी के साथ एक ज्‍यादा व्यापक वैश्विक कानूनी व्यवस्था की दिशा में नेतृत्व किया है।"

समिति ने पिल्लै की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है कि युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और नरसंहार जैसे मामलों में कानूनी कार्रवाई हो। समिति ने यह भी कहा कि पिल्लै ने देशों और राष्ट्रीय नेताओं को जवाबदेह ठहराया है और हिंसा के पीड़ितों के लिए उम्मीद जगाई है, जिससे वह "हमारे समय में अंतरराष्ट्रीय कानूनी सिद्धांतों की महान पैरोकारों में से एक हैं।"

इनपुट: IANS

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