कैंसर की दवाओं पर MRP घटाने की तैयारी, कर्नाटक ने केंद्र के फैसले का स्वागत किया
कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की ऊंची कीमतों से मरीजों को राहत मिल सकती है। केंद्र सरकार दवाओं पर भारी मुनाफे को नियंत्रित करने के लिए व्यापारिक मार्जिन की सीमा तय…
कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की ऊंची कीमतों से मरीजों को राहत मिल सकती है। केंद्र सरकार दवाओं पर भारी मुनाफे को नियंत्रित करने के लिए व्यापारिक मार्जिन की सीमा तय करने पर विचार कर रही है, जिसके बाद कई कैंसर-रोधी दवाओं के दाम 20 से 70 प्रतिशत तक कम हो सकते हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक सरकार ने इस दिशा में सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों और केंद्र के प्रयासों का स्वागत किया है।
कर्नाटक के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री यू.टी. खादर ने केंद्र से आग्रह किया है कि दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के उपाय जल्द लागू किए जाएं। उन्होंने यह भी मांग की है कि इस व्यवस्था के तहत सिर्फ कैंसर ही नहीं, बल्कि हृदय और किडनी रोगों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महंगी जीवनरक्षक दवाओं को भी शामिल किया जाए।
कर्नाटक सरकार के प्रयास और चिंताएं
राज्य सरकार ने केंद्र को बताया कि निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि दवाओं की खरीद कीमत और मरीजों से वसूले जाने वाले अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में बहुत बड़ा अंतर है। राज्य ने ऐसी 253 दवाओं और चिकित्सा सामग्रियों की पहचान की थी, जिनकी कीमतों को लेकर चिंताएं थीं। इसी आधार पर 23 सितंबर 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा को पत्र लिखकर राष्ट्रीय स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की गई थी। राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कीमतों में कमी का सीधा फायदा मरीजों को मिले, जिससे इलाज का आर्थिक बोझ कम हो सके।
केंद्र सरकार का प्रस्तावित कदम
इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई थी कि आवश्यक दवाओं का MRP, खुदरा विक्रेता को मिलने वाली कीमत से 16% अधिक तक सीमित क्यों नहीं किया जा सकता। इसी दिशा में कार्रवाई करते हुए, राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने 8 अक्टूबर को हुई अपनी बैठक में गैर-अनुसूचित कैंसर-रोधी दवाओं के व्यापारिक मार्जिन को 30% तक सीमित करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। हालांकि, इस दायरे में कौन-सी दवाएं आएंगी, उनकी अंतिम सूची अभी तैयार होनी है।
पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर
कीमतों में पारदर्शिता लाने के लिए कर्नाटक ने 1 अक्टूबर को एक सर्कुलर जारी किया, जिसमें स्वास्थ्य संस्थानों को मरीजों के बिल में दवा की खरीद लागत (landing cost) और MRP दोनों का उल्लेख करने का निर्देश दिया गया है। यह व्यवस्था 1 नवंबर 2026 से लागू करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, कर्नाटक ने कई और सुझाव भी दिए हैं:
- विशेषज्ञ समिति का गठन: विभिन्न मंत्रालयों, NPPA, राज्य सरकारों, अस्पतालों और चिकित्सा विशेषज्ञों को मिलाकर एक अंतर-मंत्रालयी समिति बनाई जाए।
- राष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन: दवा निर्माता, अस्पताल और मरीज से वसूली जाने वाली कीमत के अंतर का आकलन करने के लिए एक राष्ट्रीय अध्ययन हो।
- NPPA को मजबूती: अत्यधिक मुनाफाखोरी रोकने के लिए NPPA की प्रवर्तन शक्तियों को बढ़ाया जाए।
केंद्र सरकार का अनुमान है कि इन प्रस्तावित कदमों से लगभग 2,500 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के तहत एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है, जिसे 14 अक्टूबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी है, जिसमें उन कैंसर-रोधी दवाओं की सिफारिश की जाएगी जिन्हें मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाया जाना चाहिए।
इनपुट: IANS



