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जल गंगा अभियान के तहत 48 रेन हार्वेस्टिंग कार्य पूरे: मंदसौर में 180 परियोजनाओं से भू-जल बढ़ाने पर फोकस, बावड़ियों के जीर्णोद्धार भी तेज हुए – Mandsaur News

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जल गंगा अभियान के तहत 48 रेन हार्वेस्टिंग कार्य पूरे:  मंदसौर में 180 परियोजनाओं से भू-जल बढ़ाने पर फोकस, बावड़ियों के जीर्णोद्धार भी तेज हुए – Mandsaur News

जल गंगा अभियान के तहत 48 रेन हार्वेस्टिंग कार्य पूरे: मंदसौर में 180 परियोजनाओं से भू-जल बढ़ाने पर फोकस, बावड़ियों के जीर्णोद्धार भी तेज हुए – Mandsaur News


मध्यप्रदेश सरकार द्वारा संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत मंदसौर जिले में जल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में लगातार प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। अभियान के तहत जिले में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के 48 कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं, जबकि 84 कार्यों पर निर्माण कार्य तेजी से जारी है। जिला पंचायत द्वारा कुल 180 कार्यों का चयन किया गया था, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। अभियान के तहत शासकीय भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है। इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का संग्रहण कर उसे सीधे जमीन में समाहित किया जाएगा। इससे धरती के जल स्तर में वृद्धि होगी और भविष्य में संभावित जल संकट की स्थिति से राहत मिलने की उम्मीद है। जिलेभर में चल रहे विविध जल संरक्षण कार्य
जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जिले में कई प्रकार के जल संरक्षण कार्य व्यापक स्तर पर संचालित किए जा रहे हैं। इनमें कंटूर ट्रेंच निर्माण, पर्कोलेशन तालाब निर्माण, अमृत सरोवर निर्माण, खेत तालाब निर्माण तथा डगवेल रिचार्ज जैसे कार्य प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन प्रयासों के माध्यम से वर्षा जल को संरक्षित कर भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए जिले के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर आमजन के लिए सार्वजनिक प्याऊ भी स्थापित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य राहगीरों और नागरिकों को स्वच्छ एवं ठंडा पेयजल उपलब्ध कराना है। “एक बगिया मां के नाम” अभियान से बढ़ेगा हरित क्षेत्र
पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से जिले में “एक बगिया मां के नाम” परियोजना के तहत फलदार पौधों का रोपण किया जा रहा है। यह अभियान जनभागीदारी के साथ संचालित किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ लोगों में प्रकृति के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है। अभियान के तहत जिले की प्राचीन एवं परंपरागत जल संरचनाओं के संरक्षण और प्राचीन बावड़ियों के जीर्णोद्धार का कार्य भी प्राथमिकता से किया जा रहा है। इससे ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण होने के साथ-साथ जल संग्रहण क्षमता में भी वृद्धि होगी। जिला प्रशासन ने आमजन से जल संरक्षण के प्रति जागरूक होकर वर्षा जल संचयन एवं जल बचत के उपाय अपनाने की अपील की। प्रशासन का कहना है कि सामूहिक प्रयासों से ही आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

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