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आज का एक्सप्लेनर: क्या ममता की राजनीति अब कांग्रेस के सहारे, वापसी क्यों मुश्किल; कैसे बागी हुए 58 विधायक और 20 सांसद

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आज का एक्सप्लेनर:  क्या ममता की राजनीति अब कांग्रेस के सहारे, वापसी क्यों मुश्किल; कैसे बागी हुए 58 विधायक और 20 सांसद

आज का एक्सप्लेनर: क्या ममता की राजनीति अब कांग्रेस के सहारे, वापसी क्यों मुश्किल; कैसे बागी हुए 58 विधायक और 20 सांसद

TMC के 58 विधायकों की टूट और अब 20 सांसदों के बागी होने का दावा। ममता बनर्जी के पास अब सिर्फ 22 विधायकों और 8 सांसदों का समर्थन बाकी है। खेमे के सांसदों से लेकर पार्टी नेताओं तक पर हमले हो रहे। इस बीच ममता लगातार दो दिन सोनिया गांधी से मिलीं। INDIA ब

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क्या ममता के पास यही अकेला चारा बाकी, TMC के बागी सांसदों से बीजेपी को क्या फायदा और क्या ममता की राजनीतिक वापसी हो पाएगी, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…

सवाल-1: क्या 58 विधायकों के बाद TMC के 20 सांसद भी टूट जाएंगे?

जवाब: TMC में टूट की शुरुआत 6 मई की शाम ममता के घर पर हुई एक बैठक से हुई थी। करीब एक महीने में ममता अपने 58 विधायक गंवा चुकी हैं। अब खबरें हैं कि 20 सांसद भी बगावत कर रहे हैं। पूरी टाइमलाइन समझिए…

  • 6 मई की मीटिंग में ममता ने शोभनदेव भट्टाचार्या को विपक्ष का नेता चुना। कुछ TMC विधायकों ने इसका विरोध किया।
  • इस बगावत का चेहरा बने TMC विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा। दोनों ने बागी विधायकों के साथ अलग गुट बनाने की तैयारी की।
  • 22 मई को ऋतब्रत दिल्ली में बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी से मिले और बंगाल लौटकर अभिषेक से असंतुष्ट विधायकों को एकजुट करना शुरू किया। ये भी खबरें आईं कि TMC के कई सांसद भी बीजेपी में शामिल होना चाहते हैं।
  • 3 जून को ऋतब्रत बनर्जी ने TMC के 80 में से 58 विधायकों के समर्थन वाला पत्र विधानसभा स्पीकर रथींद्र दास को सौंपा। दास ने इसे स्वीकारा और ऋतब्रत को विधानसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त कर दिया।
  • ऋतब्रत ने बगावत की वजह ममता के भतीजे और TMC सांसद अभिषेक बनर्जी को बताया। कहा कि चुनाव में पार्टी की हार के लिए अभिषेक और प्रचार का जिम्मा संभालने वाली I-PAC जिम्मेदार हैं।

ऋतब्रत बनर्जी ने 3 जून को विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र दास को 58 विधायकों का समर्थन पत्र दिया। इसके बाद स्पीकर ने उन्हें विपक्ष के नेता के लिए आवंटित कमरे की चाबी सौंपी।

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  • 4 दिन बाद 8 जून को ममता INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल होने दिल्ली पहुंची। इधर बंगाल में TMC के 11 लोकसभा सांसद केंद्रीय मंत्री और BJP के बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के घर मीटिंग कर रहे थे। CM शुभेंदु भी वहीं थे।
  • TMC के सभी पदों से इस्तीफा दे चुकीं सांसद काकोली घोष दस्तीदार भी मीटिंग में शामिल थीं। काकोली ने दावा किया कि उनके साथ TMC के 28 में से 20 सांसद हैं।
  • उन्होंने इसके लिए लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को चिट्ठी दी और संसद में TMC से अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है।
  • 9 जून को TMC सांसद कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। बनर्जी ने बहरामपुर से TMC सांसद यूसुफ पठान को लेकर कहा, ‘उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह से फोन पर बात की है और शाह ने उन्हें दिल्ली मिलने के लिए बुलाया है।’
  • भूपेंद्र यादव के घर पर हुई मीटिंग में काकोली के साथ प्रसून बनर्जी, कालीपत सोरेन, अमित कुमार माल, शताब्दी रॉय, शर्मिला सरकार समेत 12 सांसद मौजूद थे।
  • मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, काकोली आगे माला रॉय, मिताली बेग, सजदा अहमद, शत्रुघ्न सिन्हा और प्रतिमा मोंडल समेत 7 और सांसदों को तोड़ने में जुटी हैं। अगर वे कामयाब हुईं, तो ममता के पास लोकसभा में सिर्फ 8 सांसद रह जाएंगे।

8 जून को BJP के बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के घर बैठक हुई, जिसमें कांग्रेस के 12 लोकसभा सांसद और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे मौजूद थे।

कीर्ति आजाद ने दावा किया, ‘काकोली का 20 सांसदों वाला दावा झूठा है। उनके पास सिर्फ 12-13 सांसद हैं। उन्होंने बताया नहीं कि नंबर कितने हैं। दो तिहाई हुए या नहीं। वर्ना अब तक आपने नंबर जारी कर दिया होता। स्पीकर को चिट्ठी में क्या लिखा, ये भी बता दिया होता।’

सवाल-2: काकोली के साथ 20 सांसदों वाले दावे के क्या मायने हैं?

जवाब: दरअसल, 1985 में केंद्र की राजीव गांधी सरकार ने संविधान में 10वीं अनुसूची जोड़ी थी। इसे ही दल-बदल विरोधी कानून कहा जाता है। इसके मुताबिक, विधायक या सांसद पार्टी की सदस्यता छोड़ें, पार्टी व्हिप को न मानें, तो पार्टी की शिकायत पर लोकसभा या विधानसभा अध्यक्ष उसकी सदस्यता रद्द कर सकते हैं।

हालांकि इसमें अपवाद ये है कि अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई विधायक या सांसद दूसरी पार्टी में जाना चाहे, तो वो अयोग्य नहीं ठहराए जा सकते। यानी अगर कम से कम दो-तिहाई सदस्य एक साथ अलग हों, तो इसे दल-बदल नहीं, बल्कि विलय माना जाता है। ऐसे में उनकी सदस्यता बरकरार रहती है।

फिलहाल लोकसभा में TMC के 28 सांसद हैं। यानी दो तिहाई का आंकड़ा पूरा करने के लिए काकोली को कम से कम 19 सांसदों का समर्थन जुटाना होगा।

काकोली के 20 बागी सांसदों के समर्थन वाले दावे में 2 पेच भी हैं…

पहला: अब तक वो चिट्ठी सामने नहीं आई है, जिसमें काकोली ने 20 सांसदों के समर्थन की बात कही है।

दूसरा: दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए बागी सांसदों के लिए एकजुट होना या फिर दूसरी पार्टी में शामिल होना जरूरी माना जाता है। अब तक ये साफ नहीं है कि ये सभी सांसद बीजेपी जॉइन कर सकते हैं।

कल्याण बनर्जी ने 9 जून को कहा, ‘मुझे नहीं पता कौन क्या दावा कर रहा है, लेकिन जिस चिट्ठी का जिक्र काकोली घोष ने किया है, वह अब तक सार्वजनिक नहीं है। सोमवार को ओम बिड़ला के ऑफिस में सांसदों की कोई चिट्ठी नहीं दी गई है। ‘

कल्याण बनर्जी ने ये भी कहा कि बागी सांसद दल-बदल विरोधी कानून के तहत पार्टी नहीं छोड़ सकते।

कीर्ति आजाद ने भी कहा, ‘अगर इस झूठ को मान भी लें कि उनके (काकोली के) साथ 20, 21 या 22 सांसद हैं, तो उन्हें बीजेपी में विलय करना होगा।’

काकोली घोष दस्तीदार के बयान के बाद TMC नेता कल्याण बनर्जी और कीर्ती आजाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बागी विधायकों पर निशाना साधा।

10वीं अनुसूची के पैराग्राफ 6 के मुताबिक, स्पीकर या सदन के चेयरपर्सन ही दल-बदल पर आखिरी फैसला लेंगे। हालांकि 1991 में सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि स्पीकर के फैसले की कानूनी समीक्षा हो सकती है।

सवाल-3: तो अब ममता बनर्जी के पास आगे के क्या रास्ते हैं?

जवाब: अभी 3 सिनैरियो बन रहे हैं…

1. बचे हुए नेताओं के साथ दोबारा पार्टी खड़ी करें

  • अलग हुए 58 विधायक और काकोली 20 सांसदों का समर्थन जुटा लें, तो ये पूरा गुट असली TMC का दावा कर सकता है। संख्याबल के चलते पार्टी के चुनाव निशान पर भी इसी गुट का दावा मजबूत रहेगा।
  • हालांकि ऋतब्रत बनर्जी ने संकेत दिया था कि ममता TMC की प्रतीकात्मक नेता बनी रह सकती हैं, लेकिन ये मुश्किल है कि ममता उनकी सरपरस्ती के लिए तैयार हों। पार्टी में बंटवारे की नौबत आई, तो ममता TMC के बाकी कैडर को एक्टिव कर सकती हैं।
  • इसीलिए ममता मजबूत और जुझारू दिखना चाहती हैं। चुनाव में हार के बाद पहली बार ऐसा हुआ है, जब किसी सीएम ने इस्तीफा देने से मना कर दिया हो। जानकार बताते हैं कि ममता ने ‘मैं नहीं झुकूंगी’ वाला मैसेज देने और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के लिए ऐसा किया।
  • सीनियर जर्नलिस्ट प्रसून आचार्य कहते हैं, ‘ममता अभी भी पार्टी का चेहरा हैं। TMC का वोटर संगठन से नहीं, ममता की निजी छवि से जुड़ा है। जब तक वो मैदान में हैं, लोगों का उनसे जुड़ाव खत्म नहीं होगा।’
  • TMC का इतिहास भी देखें, तो 1998 में पार्टी बनने से अब तक ममता के अलावा कोई बड़ा चेहरा कभी उभर नहीं पाया। 2005 में दिग्गज नेता सुब्रत मुखर्जी और 2006 में पंकज बनर्जी ने पार्टी छोड़ी, लेकिन फिर भी ममता ने 2011 में 34 साल की लेफ्ट सरकार को उखाड़ फेंका था।
  • सीनियर जर्नलिस्ट शिखा मुखर्जी कहती हैं,ममता की छवि एक लड़ने वाली नेता की रही है। अब वो किस मुद्दे पर और किस जगह से इस लड़ाई की फिर से शुरुआत करती हैं, ये देखना होगा। हालांकि संगठन दोबारा खड़ा करना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होगा। वह 3 बार से मुख्यमंत्री और केंद्रीय विपक्ष के सबसे बड़े चेहरों में से एक हैं, लेकिन आज उनके कार्यकर्ताओं के लिए बंगाल के कई इलाकों में रहना मुश्किल हो गया है।’

2. सांसदों को पार्टी छोड़कर जाने से रोक लें

  • कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद की बातों से ये लगा कि अभी नाराज सांसदों को मनाने और बगावत रोकने की कोशिश हो रही है।
  • कीर्ति आजाद ने कहा, ‘जिनको पार्टी से तकलीफ थी, उन्हें चुनाव से पहले ये तकलीफ जाहिर करनी चाहिए थी। अगर एथिक्स हैं, तो इस्तीफा दो और बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ो।’
  • कल्याण बनर्जी ने भी कहा कि चुनाव के बाद सुखेंदु शेखर ने आरोप लगाए, लेकिन इस्तीफा देकर अच्छा काम किया। कम से कम राजनीतिक आचरण दिखाया। इन सांसदों को भी अपने क्षेत्र में जाना चाहिए और जनता का सामना करना चाहिए।
  • हालांकि ममता के लिए सांसदों की बगावत रोक पाना मुश्किल हो सकता है। TMC सांसद सुखेंदु शेखर और सुष्मिता देव ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है। खबर है कि बागी सांसदों की लिस्ट में सयानी घोष का नाम भी शामिल है। ये सभी ममता के करीबी माने जाते रहे हैं।

राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने 8 जून को TMC से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे में बंगाल की नई BJP सरकार की तारीफ की है।

सीनियर जर्नलिस्ट शिखा मुखर्जी कहती हैं, ‘ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी के घर पर एजेंसियां छापे मार रही हैं। सांसदों पर हमले हो रहे हैं। विधायकों से लेकर मेयर और पार्षदों तक पर दबाव बनाया जा रहा है।’

3. कांग्रेस से नजदीकी, केंद्र की राजनीति पर फोकस

  • ममता कई मुद्दों पर INDIA ब्लॉक से अलग लीक पर चलती दिखती थीं। हालांकि चुनाव हारने के बाद उनका नया रुख दिखा है। अब वे नेशनल लेवल पर विपक्ष की राजनीति में TMC का असर बढ़ाना चाहती हैं।
  • चुनाव हारते ही 5 मई को ममता ने कहा, ‘मेरा टारगेट बहुत क्लियर है। मैं INDIA टीम को मजबूत करूंगी… सोनिया जी, राहुल, अरविंद केजरीवाल…सभी ने मुझे फोन किया। INDIA गठबंधन के सहयोगी मेरे साथ हैं। आगे ये एकजुटता और मजबूत होगी।’
  • 4 जून को बांग्ला अखबार ‘आनंद बाजार पत्रिका’ ने दावा किया कि ममता ने अपने करीबी क्रिकेटर सौरव गांगुली के जरिए यूसुफ पठान तक मैसेज पहुंचाया कि वे बहरामपुर लोकसभा सीट से इस्तीफा दें, ताकि उपचुनाव में ममता खुद यहां से जीतकर संसद पहुंच सकें। हालांकि पठान ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
  • 8 जून को दिल्ली में हुई INDIA गठबंधन की बैठक में ममता बनर्जी की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी मुलाकात हुई। ममता सोनिया से गले भी मिलीं। TMC ने ये फोटो एक भावात्मक कैप्शन के साथ शेयर की।
  • मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मीटिंग में ममता ने ये भी कहा, ‘अब मैं फ्री हूं, मेरी INDIA ब्लॉक में जिम्मेदारी बढ़ाई जाएं।’
  • मीटिंग के अगले दिन ममता ने सोनिया के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात भी की। राहुल गांधी भी मौजूद रहे।

शिखा मुखर्जी बताती हैं, ‘कांग्रेस और INDIA गठबंधन SIR के खिलाफ अभियान खड़ा करने की प्लानिंग कर रहा है, ममता देशभर में इसका प्रचार करने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं, क्योंकि बंगाल SIR से BJP को फायदा मिलने का सबसे ताजा उदाहरण है।’

ये भी अटकलें लगाई गईं कि ममता अपनी वाली TMC का कांग्रेस में विलय कर सकती हैं।

सवाल-4: क्या ममता कांग्रेस में विलय भी कर सकती हैं?

जवाब: फिलहाल इसकी संभावना कम है। कांग्रेस के सीनियर नेता अधीर रंजन चौधरी ने ममता के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों को खारिज किया है।

अधीर ने कहा, ‘ममता ने मेघालय, त्रिपुरा और गोवा जैसे राज्यों में कांग्रेस को कमजोर करने के लिए उम्मीदवार उतारे थे। तो अब विलय या करीबी की बात कैसी? अभी भी लड़ते जाओ, किसने रोका है।’

ममता की INDIA ब्लॉक के नेतृत्व की इच्छा पर अधीर ने कहा, ‘अगर आप फ्री हैं, तो अपनी पार्टी को सारे हिंदुस्तान में फैलाइए। किसने मना किया है? हमने ममता को नहीं बुलाया, वो मजबूरी में कांग्रेस के पास आई हैं।’

शिखा मुखर्जी कहती हैं, ‘ममता के कांग्रेस में विलय की संभावना कम हैं, क्योंकि उन्होंने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर बड़े जतन से अपनी पार्टी TMC खड़ी की थी। फिर वे 3 बार सीएम बनीं। अब एक झटके के चलते अगर ममता TMC को खत्म करके फिर से कांग्रेस में चली जाएंगी, तो इससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचेगा। वो ये बात जानती हैं।’

सवाल-5: ममता की TMC के कमजोर होने से BJP को क्या फायदा होगा?

जवाब: इससे केंद्र में BJP को 2 बड़े फायदे हैं…

1. INDIA गठबंधन के सांसद घटेंगे

  • 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 240 सीटें मिलीं, यानी अपने दम पर बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई।
  • अभी बीजेपी की अगुवाई वाले NDA गठबंधन में 293 सांसद हैं, जबकि विपक्षी गठबंधन INDIA में 234 सांसद हैं।
  • ऐसे में अगर TMC के सांसद अलग होते हैं, तो इंडिया ब्लॉक के सांसदों की संख्या घटेगी। वहीं इन बागी सांसदों का रुख केंद्र सरकार और BJP के लिए संख्या बल के लिहाज से फायदेमंद साबित होगा।

2. NDA के सहयोगी दलों पर BJP की निर्भरता घटेगी

  • चंद्रबाबू नायडू की TDP के 16 और नीतीश कुमार की JDU के 12 सांसदों की बदौलत NDA को बहुमत हासिल है। इन पर बीजेपी की निर्भरता घटेगी।
  • राज्यसभा में भी NDA के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है। ऐसे में विपक्षी दलों में कोई टूट हो, तो राज्यसभा में भी सत्ता पक्ष की स्थिति मजबूत होगी, और उसके लिए विधेयक पारित कराना आसान हो सकता है।

अधीर रंजन चौधरी कहते हैं, ‘TMC के बागी सांसद बीजेपी और नरेंद्र मोदी के अधूरे सपनों को पूरा करेंगे। बीजेपी अब अपने बचे हुए एजेंडे परिसीमन बिल और वन नेशन-वन इलेक्शन बिल को संसद में पारित करा लेगी।’

***** रिसर्च सहयोग – प्रथमेश व्यास ———————————————————– ये खबर भी पढ़ें…

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6 मई की शाम। बंगाल चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी ने घर पर TMC विधायकों की बैठक बुलाई। इसमें अभिषेक बनर्जी की चुनावी भूमिका की तारीफ करते हुए खड़े होकर तालियां बजाने को कहा। कुछ विधायक खड़े हुए। कुछ चुपचाप बैठे रहे। बैठे रहने वालों में एक थे ऋतब्रत बनर्जी। पढ़ें पूरी खबर…

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