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लखनऊ- विद्या मंदिर गर्ल्स हाईस्कूल को मिला दोबारा कब्जा: 243 छात्राओं को मिला अपना स्कूल, ताला खुलते ही खिल उठे चेहरे – Lucknow News

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लखनऊ- विद्या मंदिर गर्ल्स हाईस्कूल को मिला दोबारा कब्जा:  243 छात्राओं को मिला अपना स्कूल, ताला खुलते ही खिल उठे चेहरे – Lucknow News

लखनऊ- विद्या मंदिर गर्ल्स हाईस्कूल को मिला दोबारा कब्जा: 243 छात्राओं को मिला अपना स्कूल, ताला खुलते ही खिल उठे चेहरे – Lucknow News


लखनऊ के हजरतगंज स्थित विद्या मंदिर गर्ल्स हाईस्कूल में आखिरकार बुधवार को वह पल आ ही गया। जिसका छात्राओं और शिक्षिकाओं को बेसब्री से इंतजार था। छह दिन की लंबी जद्दोजहद के बाद बुधवार दोपहर करीब डेढ़ बजे पुलिस ने स्कूल का ताला तोड़ा गया। दो दिन से गेट खोलने के एवज में पुलिस फोर्स का शुल्क जमाने कराने वाली हजरतगंज पुलिस बुधवार को बिना शुल्क के गेट खोल दिया। भीषण गर्मी में करीब तीन बजे से स्कूल के बाहर खड़े बच्चे और शिक्षिकाओं में स्कूल का ताला खुलते ही खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बच्चों ने मैनेजर और प्रिंसपल मैंम से कहा कि अब हमारी पढ़ाई बाधित नहीं होगी। पहली जुलाई से स्कूल खुलने पर यहीं पर पढ़ाई कर सकेंगे। स्कूल के भीतर पहुंचे बच्चों और शिक्षिकाओं ने खुले में बिखरा पड़े बच्चों व शिक्षकों के जरूरी दस्तावेज, फर्नीचर व अन्य सामान धूल से सने देख भावुक हो गए। पुलिस ने स्कूल प्रबंधन को दोबारा विद्यालय का कब्जा सौंपा। स्कूल में पढ़ने वाले 243 बच्चों को स्कूल भी मिल गया। तीन घंटे गेट पर खड़े रहे बच्चे और शिक्षिकाएं स्कूल खुलने के उत्साह में स्कूल की मैनेजर संतोष रस्तोगी, प्रधानाचार्या रश्मि यादव, शिक्षिकाएं, बच्चे और कुछ शिक्षक नेता बुधवार सुबह 10:30 बजे मुख्य द्वार पर पहुंच गए थे, लेकिन पुलिस करीब तीन घंटे बाद पहुंची। तेज धूप और गर्मी के बावजूद बच्चे और शिक्षिकाएं तीन घंटे तक गेट के बाहर डटे रहीं। डीआईओएस देवेन्द्र कुमार पाण्डेय की ओर से भेजे गए एडीआईओएस श्रीराम सुजान मिश्रा की मौजूदगी में पुलिस ने जैसे ही ताला खोला। बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई। बच्चों एवं शिक्षकों के समर्थन में उप्र.माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के प्रदेश अध्यक्ष सोहनलाल वर्मा, और दूसरे शिक्षक संगठन के प्रादेशिक उपाध्यक्ष एवं उपभोक्ता डॉ.आरपी मिश्र एवं जिलाध्यक्ष अनिल शर्मा आदि मौजूद रहे। मैदान में कबाड़ की तरह पड़ा मिला सामान स्कूल के अंदर दाखिल होते स्कूल का कीमती फर्नीचर, क्लासरूम का सामान, फर्नीचर और बेहद जरूरी सरकारी व शैक्षणिक दस्तावेज खुले मैदान में खुले में पड़े थे। एक हफ्ते से बंद रहने के कारण पूरा परिसर और सामान धूल की मोटी परत से पटा हुआ था। जिसे दोबारा व्यवस्थित करना स्कूल प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होगा। फिर भी छात्राओं और शिक्षिकाओं का कहना है कि सामान की बदहाली को वे सब मिलकर ठीक कर लेंगी। सबसे बड़ी खुशी की बच्चों की पढ़ाई और शिक्षिकोओं की सेवा सुरक्षा का रास्ता साफ हो गया है। फर्नीचर टूटा और बोर्ड उखाड़ा गेट खुलने के बाद अंदर पहुंचे स्कूल प्रबंध समिति ने सामान देखा तो होश उड़ गए। बच्चों व शिक्षिकाओं के बैठने का फर्नीचर टूटा हुआ था। कक्षाओं में लगे बोर्ड बाहर क्षतिग्रस्त हालात में पड़े थे। स्कूल की मैनेजर ने पुलिस से समान के साथ छेड़छाड़ की शिकायत की। हालांकि पुलिस ने बिना कुछ बोले चली गई। चार जून को स्कूल के जबरन खाली कराए जाने दौरान सारा सामान गैर जिम्मेदारी से मैदान में फेंक दिया था। ये है मामला वर्ष 1936 से संचालित हजरतगंज के नरही स्थित इस विद्यालय को एडीएम पूर्वी की कोर्ट ने किराएदारी के विवाद में बिना विद्यालय पक्ष को सुने 21 अप्रैल को विद्यालय परिसर खाली करने का अदेश दे दिया था। बीते 4 जून को पुलिस की मौजूदगी में स्कूल को खाली करा लिया गया। स्कूल व विद्यार्थियों के अभिलेख, फर्नीचर, पंखे, कम्प्यूटर और शैक्षिक सामग्री खुले में बाहर निकालकर फेंक दी गयी थी। इस कार्रवाई पर स्कूल की छात्राओं ने प्रदर्शन किया था और मुख्यमंत्री से स्कूल के गेट पर लगे ताले को खुलवाने की गुहार लगायी थी। सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा, माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के प्रदेश अध्यक्ष सोहन लाल वर्मा आदि ने भी स्कूल बचाने का समर्थन किया था। एडीएम कोर्ट ने सोमवार को डीआईओएस की ओर से उपलब्ध कराए गए पत्रावलियों का निरीक्षण किया व प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए अपने पूर्व के आदेश को वापस ले लिया था। उन्होंने पूर्व की भांति विद्यालय प्रबन्धन को तत्काल कब्जा दिलाने का आदेश जारी किया था।

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