राकेश टिकैत मूल निवासी कहां के है और उनका शिक्षा क्या है?
किसान नेता राकेश टिकैत एक चर्चा में बने हुए हैं। केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत किसानों ने गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में ट्रैक्टर परेड…
किसान नेता राकेश टिकैत एक चर्चा में बने हुए हैं। केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत किसानों ने गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकाली। इस दौरान कई जगहों पर पुलिस और कुछ किसानों के बीच टकराव हुआ। किसानों ने तय रूट का उल्लंघन करते हुए कई जगहों पर बैरिकेड तोड़े तो पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज करते हुए आंसू गैस के गोले दागे।
इस घटनाक्रम के बाद दो किसान नेता आंदोलन से अलग हो गए हैं। भाकियू (भानु गुट) और वीएम सिंह आंदोलन से अलग हो गए हैं। गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली के दौरान किसानों के उपद्रव के बाद उनकी अगुआई करने वाले किसान नेताओं के सुर भी अब बदले-बदले से हैं। इन सबके बीच राकेश टिकैत किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं और ट्रैक्टर मार्च से पहले 'लाठी-डंडे साथ लाओ' वाले बयान के बाद लोगों के निशाने पर हैं।

दिल्ली में किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली के दौरान किसानों के उपद्रव के बाद उनकी अगुआई करने वाले किसान नेताओं के सुर अब बदले-बदले से हैं। ट्रैक्टर मार्च से पहले 'लाठी-डंडे साथ लाओ' वाला बयान देने वाले किसान नेता राकेश टिकैत एक बार फिर से चर्चा में हैं।
राकेश टिकैत अभी आरजेडी के मौजूदा नेता हैं। वह उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में सशक्त नेता हैं। उनका जन्म मुजफ्फरनगर में 1975 में हुआ। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सर ताशी नामग्याल हाई स्कूल से की और स्नातक की पढ़ाई उत्तर प्रदेश से की।
राकेश टिकैत का जन्म मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ। वह ऐसे ही मध्यमवर्गीय माहौल में पले-बढ़े हैं। राकेश ने मेरठ यूनिवर्सिटी से एमए किया। उसके बाद एलएलबी किया। वह दिल्ली पुलिस में कॉन्स्टेबल थे।
1993-94 में उनके पिता के नेतृत्व में किसान आंदोलन चल रहा था। आंदोलन बढ़ता जा रहा था। कहा जाता है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारी जब यह आंदोलन खत्म नहीं करा पाए तो उन्होंने राकेश टिकैत पर दबाव बनाना शुरू किया। दबाव पड़ने पर उन्हें नौकरी छोड़ दी।

हालांकि राकेश टिकैत का परिवार बालियान खाप से है। इस खाप का नियम है कि पिता की मौत के बाद परिवार का मुखिया घर का बड़ा होता है। चूंकि नरेश, राकेश से बड़े हैं इसलिए उन्हें बीकेयू का अध्यक्ष बनाया गया। कहा जाता है कि नरेश सिर्फ नाम के अध्यक्ष हैं, पार्टी के फैसले राकेश टिकैत ही लेते हैं। इसके अलावा वह ही पार्टी को लीड करते हैं।
2 बार लड़े चुनाव, लेकिन मिली हार
राकेश टिकैत ने किसान यूनियन के जरिए राजनीति में आने का प्रयास किया। वह 2007 में मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़े लेकिन वह यह चुनाव हार गए।
दूसरी बार उन्होंने फिर से भाग्य आजमाया और 2014 में अमरोहा से लोकसभा चुनाव लड़े। इस बार उन्हें राष्ट्रीय लोक दल पार्टी ने टिकट दिया, लेकिन वह दूसरी बार भी चुनाव हार गए।
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