होर्मुज जलडमरूमध्य: तनाव के बीच ईरान और ओमान बना रहे जहाजों के लिए 'टू-वे कॉरिडोर' की योजना
अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए अहम होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ईरान और ओमान एक नई योजना पर बातचीत कर रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस योजना का मकसद…
अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए अहम होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ईरान और ओमान एक नई योजना पर बातचीत कर रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस योजना का मकसद मौजूदा कई शिपिंग लेन की जगह एक सिंगल, टू-वे रूट बनाना है, जिसे एक हाईवे की तरह इस्तेमाल किया जा सके।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सोमवार को तेहरान में एक प्रेस ब्रीफिंग में इस बातचीत की पुष्टि की। उनके मुताबिक, यह व्यवस्था दोनों देशों के तटीय हितों और सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। अगर यह योजना सफल होती है, तो इससे न केवल क्षेत्रीय तनाव कम हो सकता है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आ रही बाधाओं से जूझ रही विश्व अर्थव्यवस्था को भी राहत मिल सकती है।
क्या है प्रस्तावित योजना?
प्रस्तावित योजना के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के आने-जाने के लिए अलग-अलग रास्ते होंगे। खाड़ी देशों की ओर जाने वाले जहाज ईरान के तट की तरफ से गुजरेंगे, जबकि बाहर निकलने वाले जहाज ओमान की तरफ वाले रास्ते का इस्तेमाल करेंगे।
न्यूज एजेंसी IRNA ने बाघेई के हवाले से बताया कि यह एक अंतरिम कॉरिडोर होगा, जो तब तक लागू रहेगा जब तक दोनों देश एक स्थायी समाधान पर सहमत नहीं हो जाते। हालांकि, ओमान की तरफ से इस मामले पर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं किया गया है।
अमेरिका की भूमिका और ईरान का रुख
इस्माइल बाघेई ने साफ किया कि इस बातचीत में ईरान और ओमान के अलावा कोई तीसरा देश शामिल नहीं है, जिससे अमेरिका इस प्रक्रिया से बाहर हो गया है। यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के ठीक उलट है, जिसमें उन्होंने कहा था कि स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए ईरान के साथ बातचीत चल रही है। बाघेई ने ट्रंप के इस दावे का खंडन किया है।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच इस जलमार्ग को लेकर गंभीर तनाव रहा है। तेहरान ने स्ट्रेट में माइनिंग की और जहाजों पर हमले किए, जबकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों को ब्लॉक कर दिया था।
पुरानी व्यवस्था और नई चुनौतियाँ
फिलहाल, इस क्षेत्र में 1968 में संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी IMO द्वारा अपनाई गई ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम (TSS) लागू है, जिसमें आने-जाने के लिए दो-दो मील चौड़ी लेन हैं। लेकिन हाल में खदानों की मौजूदगी की खबरों के बाद IMO ने जहाजों को इस रास्ते से बचने की सलाह दी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत ईरान अपने हिस्से से गुजरने वाले जहाजों से 'सर्विस फीस' वसूल सकता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन से बचाने के लिए 'टोल' नहीं कहा जाएगा।
इनपुट: IANS



