कोयंबटूर: नोय्याल नदी में मिल रहा ज़हरीला पानी, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रोजेक्ट दो साल से अटका
तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले से होकर बहने वाली नोय्याल नदी में प्रदूषण एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, नौ नगर पंचायतें अपना बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी…
तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले से होकर बहने वाली नोय्याल नदी में प्रदूषण एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, नौ नगर पंचायतें अपना बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी सीधे नदी में बहा रही हैं, जिससे भूजल और खेती पर बुरा असर पड़ रहा है। यह सब तब हो रहा है जब नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) प्रोजेक्ट को मंजूरी मिले लगभग दो साल हो चुके हैं।
यह प्रोजेक्ट 'नदंथई वाझी कावेरी' योजना का हिस्सा है, जिसे 2024 में केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के नेशनल रिवर कंजर्वेशन डायरेक्टरेट (NRCD) से हरी झंडी मिली थी। इसका उद्देश्य इरुगुर, सुलूर, कन्नमपलयम, वेल्लालोर, पेरूर, पूलुवापट्टी, वीरपांडी, अलंदुरई और थोंडामुथुर जैसे स्थानीय निकायों से निकलने वाले सीवेज को नदी में मिलने से पहले साफ करना है।
प्रोजेक्ट में देरी और किसानों की चिंता
लागत के 60% हिस्से का वहन केंद्र सरकार और 40% का तमिलनाडु सरकार द्वारा किया जाना तय हुआ है। इसके बावजूद, प्रोजेक्ट को लागू करने की गति बहुत धीमी है। इस देरी ने नदी किनारे रहने वाले किसानों की चिंता बढ़ा दी है। एक किसान और गैर-राजनीतिक किसान संघ के सदस्य राजन अरुणाचलम ने कहा, "शुरुआती घोषणा के बाद एटीपी बनाने के काम में लगभग कोई प्रगति नहीं हुई है।" उन्होंने आगे कहा कि स्थानीय निकायों से बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी लगातार नदी में जा रहा है, जिससे भूजल प्रदूषित हो रहा है और खेती करना मुश्किल होता जा रहा है।
नोय्याल नदी का महत्व और प्रशासन का पक्ष
पश्चिमी घाट से निकलने वाली नोय्याल, कावेरी नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है। यह कोयंबटूर, तिरुप्पुर, इरोड और करूर जिलों से गुजरते हुए लगभग 158.35 किलोमीटर की दूरी तय करती है। अकेले कोयंबटूर जिले में ही इसका 62.21 किलोमीटर का हिस्सा पड़ता है, जिसमें 17 बांध और 25 तालाब शामिल हैं। इस मामले पर कोयंबटूर के जिला कलेक्टर पवनकुमार जी. गिरियप्पनावर ने बताया कि प्रोजेक्ट को नोय्याल नदी के किनारे स्थित स्थानीय निकायों तक बढ़ाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रोजेक्ट अभी 'डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट' (DPR) के चरण में है और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इसे लागू किया जाएगा।
इनपुट: IANS



