शनिवार, 12 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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त्रिपुरा-मिजोरम सीमा विवाद: दशकों पुराने मुद्दे के हल के लिए बनी सहमति, अध्ययन समितियां करेंगी जांच

दशकों से चले आ रहे अंतरराज्यीय सीमा विवाद को सुलझाने के लिए त्रिपुरा और मिजोरम ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दोनों राज्यों के बीच गुरुवार को अगरतला में पहली आधिकारिक स्तर की बैठक हुई, जिसमें बातची…

त्रिपुरा-मिजोरम सीमा विवाद: दशकों पुराने मुद्दे के हल के लिए बनी सहमति, अध्ययन समितियां करेंगी जांच
(फोटो: IANS)

दशकों से चले आ रहे अंतरराज्यीय सीमा विवाद को सुलझाने के लिए त्रिपुरा और मिजोरम ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दोनों राज्यों के बीच गुरुवार को अगरतला में पहली आधिकारिक स्तर की बैठक हुई, जिसमें बातचीत के जरिए समाधान खोजने पर जोर दिया गया। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक में दो अध्ययन समितियों के गठन का फैसला लिया गया है जो जमीनी हकीकत का जायजा लेंगी।

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त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शुक्रवार को जानकारी दी कि उन्होंने इस मुद्दे पर मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा से 4 जून को शिलांग में हुई पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) की बैठक के दौरान चर्चा की थी। साहा ने बताया, "मैंने प्रस्ताव रखा था कि पहले अधिकारियों के स्तर पर बैठक हो, जिसके बाद दोनों मुख्यमंत्री इस विवाद के समाधान के लिए बातचीत करें। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने इस प्रस्ताव पर तुरंत सहमति जताई।"

विवाद सुलझाने की प्रक्रिया

अगरतला में हुई इस उच्च-स्तरीय बैठक में दोनों राज्यों के प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व उनके गृह सचिवों ने किया। त्रिपुरा की ओर से गृह सचिव अभिषेक सिंह और मिजोरम की ओर से गृह सचिव वनलालमाविया शामिल हुए। बैठक में तय हुआ कि गठित की जाने वाली दो अध्ययन समितियां विवादित क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी मुद्दों का अध्ययन करेंगी। इन समितियों की रिपोर्ट मिलने के बाद अधिकारियों के स्तर पर अगली बैठक की जाएगी।

क्या है सीमा विवाद का इतिहास?

त्रिपुरा और मिजोरम के बीच 109 किलोमीटर लंबी सीमा पर कई इलाकों को लेकर विवाद है। अक्सर जब कोई एक राज्य इन क्षेत्रों में विकास कार्य शुरू करता है, तो दूसरा राज्य आपत्ति जताता है, जिससे तनाव पैदा होता है।

यह विवाद मई 2025 में तब और गहरा गया था जब उत्तर त्रिपुरा जिले के फुलडुंगसेई गांव में एक निर्माणाधीन पर्यटन इमारत पर हमला हुआ था। इस घटना में हमलावरों ने विस्फोटकों का इस्तेमाल किया था, जिससे इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। फुलडुंगसेई गांव दोनों राज्यों के बीच सबसे संवेदनशील विवादित क्षेत्रों में से एक है, क्योंकि दोनों तरफ के स्थानीय लोग इस पर अपना दावा करते हैं। इस घटना के बाद दोनों राज्यों की पुलिस ने मिलकर इलाके का दौरा किया था और शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए थे।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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