केरल: भर्ती घोटाले की जाँच पर PSC और क्राइम ब्रांच आमने-सामने, संवैधानिक टकराव की आशंका
केरल में राज्य लोक सेवा आयोग (PSC) और क्राइम ब्रांच के बीच एक बड़ा टकराव उभरता दिख रहा है। यह मामला राज्य योजना बोर्ड में हुई भर्तियों में कथित गड़बड़ियों की जाँच से जुड़ा है, जिसमें अब PSC के सदस्यों से…
केरल में राज्य लोक सेवा आयोग (PSC) और क्राइम ब्रांच के बीच एक बड़ा टकराव उभरता दिख रहा है। यह मामला राज्य योजना बोर्ड में हुई भर्तियों में कथित गड़बड़ियों की जाँच से जुड़ा है, जिसमें अब PSC के सदस्यों से पूछताछ की तैयारी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, PSC के सदस्यों ने जाँच टीम के सामने पेश होने से इनकार करने का मन बना लिया है, जिससे यह विवाद एक संवैधानिक और कानूनी लड़ाई का रूप ले सकता है।
मामले की जाँच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने PSC के सदस्यों से पूछताछ का फैसला किया है। लेकिन, चेयरमैन एम.आर. बैजू समेत सभी 16 मौजूदा सदस्यों ने तय किया है कि नोटिस मिलने के बावजूद वे क्राइम ब्रांच मुख्यालय नहीं जाएँगे। इसके बजाय, वे इस कदम को कानूनी चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।
संवैधानिक पद और जाँच का अधिकार
PSC का तर्क है कि उसके सदस्य संवैधानिक पदों पर हैं और इस नाते संस्था की गरिमा और दर्जे की रक्षा की जानी चाहिए। उम्मीद है कि आयोग के चेयरमैन और सदस्य इस बारे में गृह सचिव को पत्र लिखेंगे। साथ ही, वे नोटिस की वैधता को लेकर वरिष्ठ वकीलों से कानूनी सलाह भी ले रहे हैं।
दूसरी ओर, क्राइम ब्रांच और सरकारी कानूनी हलकों का मानना है कि जाँच एजेंसी को यह तय करने का अधिकार है कि गवाहों या संदिग्धों से कहाँ पूछताछ की जाए। कानूनी सूत्रों के अनुसार, सिर्फ संवैधानिक पद पर होने से किसी को आपराधिक प्रक्रिया से छूट नहीं मिल जाती और जाँच की जरूरतों के हिसाब से नोटिस जारी किया जा सकता है।
जाँच का पूरा मामला क्या है?
यह जाँच केरल राज्य योजना बोर्ड में हुई दो विवादास्पद नियुक्तियों को लेकर हो रही है। SIT इन नियुक्तियों को रद्द करने की सिफारिश करने की तैयारी में है। जाँच में पहले ही PSC के दो अधिकारियों (एक सेवानिवृत्त) की तरफ से गंभीर खामियाँ पाई गई थीं, जिनके खिलाफ राज्य पुलिस प्रमुख ने विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की है। अब SIT यह पता लगा रही है कि ये खामियाँ केवल प्रशासनिक चूक थीं या किसी उम्मीदवार को फायदा पहुँचाने की सोची-समझी साजिश।
क्राइम ब्रांच के एसपी जकारिया के नेतृत्व वाली SIT द्वारा PSC सदस्यों से पूछताछ का फैसला इस जाँच के दायरे को काफी बढ़ा देता है। गौरतलब है कि PSC में स्वीकृत 21 पदों के मुकाबले अभी 16 सदस्य हैं और चेयरमैन समेत इन सभी की नियुक्ति पिछली पिनराई विजयन सरकार के कार्यकाल में हुई थी। इस मामले में अब तक किसी को औपचारिक रूप से आरोपी नहीं बनाया गया है।
इनपुट: IANS



