भारतीय वैज्ञानिकों का कमाल: विमान और अंतरिक्ष यान बनेंगे और मज़बूत, नई 3-डी कंपोजिट तकनीक को मिला पेटेंट
हवाई जहाज, अंतरिक्ष यान और रक्षा उपकरणों को हल्का लेकिन पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत बनाने की दिशा में भारतीय शोधकर्ताओं ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) राउरकेला…
हवाई जहाज, अंतरिक्ष यान और रक्षा उपकरणों को हल्का लेकिन पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत बनाने की दिशा में भारतीय शोधकर्ताओं ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) राउरकेला के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी विशेष 3-डी रीइन्फोर्स्ड एडवांस्ड कंपोजिट तकनीक विकसित की है, जिसे अब पेटेंट भी मिल गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह नवाचार एयरोस्पेस से लेकर ऑटोमोबाइल और पवन ऊर्जा तक के क्षेत्रों में क्रांति ला सकता है।
यह नई तकनीक उन सामग्रियों को बेहतर बनाती है जिनसे आजकल के आधुनिक विमान और रॉकेट बनते हैं। इन्हें फाइबर-रीइन्फोर्स्ड पॉलिमर (एफआरपी) कंपोजिट कहा जाता है, जो धातुओं से बहुत हल्के लेकिन बेहद मज़बूत होते हैं। हालांकि, लगातार दबाव और भार सहने से इनमें दरारें आने या परतें अलग होने जैसी समस्याएं आ जाती हैं। एनआईटी के शोधकर्ताओं ने इसी चुनौती का समाधान खोज निकाला है।
कैसे काम करती है यह नई तकनीक?
शोधकर्ताओं ने एक नया 3-डी रीइन्फोर्स्ड हाइब्रिड कंपोजिट तैयार किया है, जिसमें ग्लास फाइबर और ग्राफीन नैनोप्लेटलेट्स का इस्तेमाल किया गया है। निर्माण के दौरान इन दोनों को कंपोजिट की मोटाई की दिशा में इस तरह व्यवस्थित किया जाता है कि पूरी आंतरिक संरचना ज़्यादा मज़बूत हो जाती है। इसके लिए निर्माण प्रक्रिया में मामूली बदलाव कर 800 वोल्ट, 50 हर्ट्ज एसी विद्युत क्षेत्र का उपयोग किया गया। खास बात यह है कि इसमें ग्राफीन नैनोप्लेटलेट्स का बिना किसी रासायनिक बदलाव के इस्तेमाल किया गया है, जिससे इस तकनीक को मौजूदा औद्योगिक उत्पादन प्रणाली में अपनाना आसान हो जाता है।
किन क्षेत्रों में होगा इसका उपयोग?
एनआईटी राउरकेला के सहायक प्रोफेसर डॉ. राजेश कुमार प्रस्ती के अनुसार, यह तकनीक उन सभी जगहों पर काम आएगी जहाँ हल्के लेकिन अत्यधिक मज़बूत और क्षति-सहनशील मटेरियल की ज़रूरत होती है। इसके प्रमुख उपयोगों में शामिल हैं:
- विमानों के पैनल और ढाँचे
- ऑटोमोबाइल की क्रैश संरचनाएं
- पवन चक्की के ब्लेड (पवन टरबाइन ब्लेड)
- प्रेशर वेसल और समुद्री संरचनाएं
- हाइड्रोजन भंडारण टैंक
विशेषज्ञों का मानना है कि विमान का वजन कम होने और मज़बूती बढ़ने से ईंधन की खपत घटती है, रखरखाव का खर्च कम होता है और विमान की परिचालन क्षमता बढ़ती है। प्रयोगशाला में हुए परीक्षणों में इस कंपोजिट ने बेहद शानदार प्रदर्शन किया है।
'आत्मनिर्भर भारत' को मिलेगी मज़बूती
एनआईटी के प्रोफेसर बंकिम चंद्र राय ने कहा, "यह तकनीक हल्के और मजबूत मटेरियल के जरिए ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, रखरखाव लागत कम करने और सतत विनिर्माण को बढ़ावा देने में मदद करेगी।" उनका मानना है कि उन्नत सामग्री के क्षेत्र में यह नवाचार भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को भी मज़बूती देगा। शोध दल अब इस तकनीक को प्रयोगशाला से उद्योग तक पहुँचाने के लिए प्रौद्योगिकी लाइसेंसिंग और औद्योगिक साझेदारी पर काम कर रहा है।
इनपुट: IANS



